सारण, 11 फ़रवरी। महाशिवरात्रि के पावन पर्व के पूर्व छपरा शिवमय होने लगी है। वर्षों से चली आ रही परंपरा को जीवंत रखते हुए दौतलगंज स्थित ऐतिहासिक श्रीराम जानकी मंदिर छत्रधारी बाजार में मंगलवार को देवाधिदेव महादेव का तिलक उत्सव पूरी श्रद्धा, हर्षोल्लास और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। समाजसेवी धर्मनाथ पिंटू के अनुसार दोपहर से ही मंदिर परिसर में उत्सव का माहौल दिखने लगा था।
इस अवसर पर शहर के विभिन्न मोहल्लों से बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु मंदिर पहुँचीं। परंपरा के बाबत भोलेनाथ के तिलक की रस्में निभाई गईं। महिलाओं ने मांगलिक गीतों के माध्यम से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। “शिव के तिलक चढ़े...” और “आजु जनकपुर में मड़वा...” जैसे गीतों पर महिलाएं झूमती नजर आईं। हल्दी, अक्षत, चंदन और फल-फूल के साथ बाबा का तिलक किया गया, जो इस बात का प्रतीक है कि भक्त अब अपने आराध्य के विवाह महाशिवरात्रि की तैयारियों में पूरी तरह जुट गए हैं। यह तिलक उत्सव केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि दो शक्ति केंद्रों का मिलन भी है। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में मनोकामना नाथ मंदिर और सिद्धेश्वर नाथ मंदिर नबीगंज की महत्ता को दर्शाया गया, जहाँ भक्तों की अपार भीड़ उमड़ी।
समिति के राजेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि यह परंपरा पूर्वजों के समय से चली आ रही है, जिसे आज की युवा पीढ़ी भी उसी श्रद्धा और मनोयोग से निभा रही है। उन्होंने कहा, बाबा का तिलक उत्सव समाज में एकता और भक्ति का संदेश देता है। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत है जिसे हम सहेज कर रख रहे हैं। इस अवसर पर समस्त भक्तगणों और प्रबुद्ध नागरिकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। तिलक की रस्म पूरी होने के साथ ही अब भक्तों को उस घड़ी का बेसब्री से इंतज़ार है जब महाशिवरात्रि के दिन बाबा भोलेनाथ की भव्य बारात निकलेगी।
