भाजपा ने पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर 'समर्पण दिवस' मनाया, उपवन में स्मृति सभा का आयोजन | The Voice TV

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भाजपा ने पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर 'समर्पण दिवस' मनाया, उपवन में स्मृति सभा का आयोजन

Date : 11-Feb-2026

 नई दिल्ली, 11 फरवरी । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि को समर्पण दिवस के रूप में मनाते हुए बुधवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय उपवन में स्मृति सभा का आयोजन किया। सभी 14 जिला कार्यालयों में उनके प्रति समर्पण दिवस कार्यक्रम हुए।

भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने दीनदयाल उपाध्याय के बलिदान दिवस पर कहा कि आज पार्टी के सबसे अधिक विधायक, सांसद और स्थानीय निकायों में जनप्रतिनिधि है लेकिन संगठन जहां से उठकर आज विश्व का सबसे बड़ा संगठन बना है उसके पीछे के संघर्षों को हमें याद रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय उन सफल व्यक्तित्व में से एक हैं जिन्होंने जनसंघ की नींव रखी।

शिव प्रकाश ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता के पश्चात देश और दुनिया के अंदर राजनीतिक क्षेत्र में तीन विचार- पूंजीवाद, साम्यवाद और समाजवाद बहुत तेजी से अलग-अलग देशों में उभर रहे थे। उसी दौरान भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद इस बात पर चर्चा हो रही थी कि भारत का स्वरुप क्या होगा। इस पर विचार करने के लिए पार्टी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को दायित्व दिया और लंबे विचार विमर्श के बाद उन्होंने जो विचार दिया वह है एकात्म मानववाद जो आज भारत को एक ओजस्वी राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि दीनदयाल ने एक विधान एक संविधान के विचार को मजबूत करने पर जोर दिया और इसके पीछे संगठन की शक्ति थी। 1952-68 तक जनसंघ में राष्ट्र व्यापी एक ढ़ाचा तैयार किया। उनके अथक प्रयास और यह पं. दीनदयाल उपाध्याय के पुरुषार्थ का परिणाम है कि 1964 आते-आते कांग्रेस के विकल्प के रुप में भारतीय जनसंघ स्थापित हो गया और दिल्ली नगर निगम के चुनाव जीतकर पहली बार किसी निकाय में सत्ता में आई।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष विरेंद्र सचदेवा ने कहा कि आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर राष्ट्र उन्हें एक ऐसे विचारक और कर्मयोगी के रूप में स्मरण कर रहा है, जिन्होंने भारतीय राजनीति को सत्ता की नहीं, बल्कि सेवा की दिशा दी।

उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित “एकात्म मानववाद” का सिद्धांत आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था। उनका विचार था कि समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीति को अलग-अलग खांचों में नहीं देखा जा सकता। मानव जीवन की भौतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक आवश्यकताओं का संतुलित विकास ही सच्ची प्रगति है।

सचदेवा ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चल रही जनकल्याणकारी योजनाएं गरीब कल्याण, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, किसान सम्मान निधि और आत्मनिर्भर भारत पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की ही आधुनिक अभिव्यक्ति हैं।

सचदेवा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का निजी जीवन सादगी, अनुशासन और त्याग का अद्भुत उदाहरण रहा। उन्होंने राजनीति को आजीविका नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का माध्यम माना। सत्ता और पद से दूर रहते हुए भी उन्होंने करोड़ों कार्यकर्ताओं को राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि उनकी पुण्यतिथि पर यह आवश्यक है कि उनके विचारों को केवल स्मरण तक सीमित न रखें, बल्कि अपने व्यवहार और कार्यों में उतारें। सामाजिक समरसता, राष्ट्र प्रथम की भावना और अंत्योदय का संकल्प यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस अवसर पर आयोजित स्मृति सभा में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, सांसद मनोज तिवारी, सांसद एवं प्रदेश महामंत्री योगेन्द्र चांदोलिया, पूर्व अध्यक्ष आदेश गुप्ता, प्रदेश महामंत्री विष्णु मित्तल के साथ विधायक अजय महावर, आलावा सभी 14 जिलाध्यक्षों के साथ दिल्ली के उपमहापौर जयभगवान यादव, स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा, वरिष्ठ निगम पार्षद योगेश वर्मा, संदीप कपूर आदि उपस्थित रहें।


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