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उत्तराखंड में 153 शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का रास्ता साफ, सीएए के तहत प्रक्रिया पूरी

Date : 23-Feb-2026

 देहरादून, 23 फरवरी। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के प्रावधानों के तहत उत्तराखंड में रह रहे 153 हिंदू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दिए जाने की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। केंद्र और राज्य के गृह विभाग की ओर से विस्तृत जांच-पड़ताल के बाद इनके आवेदनों की स्वीकृति से भारतीय नागरिका दिए जाने का रास्ता साफ हाे गया है।

साेमवार काे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि सीएए के माध्यम से वर्षों से भारत में रह रहे शरणार्थी परिवारों को न्याय मिला है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वीकृत आवेदनों में 147 लोग पाकिस्तान और 6 लोग अफगानिस्तान से आए हैं। ये सभी 31 दिसंबर 2014 से पूर्व भारत में शरण लेने वाले आवेदकों की श्रेणी में आते हैं। पाकिस्तान से आए कुल 189 लोगों ने नागरिकता के लिए आवेदन किया था, जिनमें से 51 आवेदनों पर अभी विचार प्रक्रिया जारी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, देशभर में अब तक सीएए के तहत सैकड़ों लोगों को नागरिकता प्रदान की जा चुकी है और विभिन्न राज्यों में आवेदनों की प्रक्रिया जारी है।

इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 7 मार्च को उत्तराखंड के दौरे पर आना प्रस्तावित है। हरिद्वार में आयोजित प्रस्तावित कार्यक्रम में स्वीकृत आवेदनकर्ताओं काे नागरिकता का सम्मान किए जा सकता है। राज्य सरकार और संबंधित संगठनों की ओर से पात्र व्यक्तियों से संपर्क साधा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, उत्तराखंड में नागरिकता पाने वाले अधिकांश लोग पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान क्षेत्र से संबंधित हैं। इनके परिजन पहले से देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और उधम सिंह नगर में निवासरत हैं, जिसके चलते इन्हें राज्य में आश्रय मिला। बताया गया है कि हिंगलाज माता मंदिर से जुड़े एक पुजारी परिवार को भी नागरिकता प्रदान की गई है। जानकारी के मुताबिक सीमा जागरण मंच ने ऐसे नागरिकों की खोज कर उनसे संवाद स्थापित किया और उनके आवेदन पत्र भरवाए गए।

उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन कर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया था। संसद में विधेयक पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति ने भी की स्वीकृति दे दी थी।


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