जयपुर, 06 अप्रैल। राजस्थान में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने और बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से 7 अप्रैल, मंगलवार को जयपुर में पहली बार क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन, पश्चिम क्षेत्र जोनल कॉन्फ्रेंस का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे तथा मुख्य अतिथि प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा रहेंगे।
आयुक्त कृषि नरेश कुमार गोयल ने बताया कि सम्मेलन को विशेष और यादगार बनाने के लिए पारंपरिक राजस्थानी संस्कृति को प्रमुखता दी जा रही है। सम्मेलन के दौरान प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी मंजू राजपाल द्वारा “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” पहल के अंतर्गत राज्य में अपनाई गई सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया जाएगा। राजस्थान में कुल 99.28 लाख हैक्टेयर सिंचित क्षेत्र है जिसमें से सूक्ष्म सिंचाई द्वारा 32.49 लाख हैक्टेयर सिंचित है। राज्य सरकार समस्त सिंचित क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई अंतर्गत लाने के लिए प्रयासरत हैं। पीडीएमसी के विभिन्न कंपोनेंट यथा बूंद बूंद सिंचाई, फव्वारा, मिनी स्प्रिंकलर का अन्य कार्यक्रमों सोलर पंप, फार्म पॉन्ड, डिग्गी आदि के साथ अभिसरण किया गया है। सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रों पर राज्य सरकार द्वारा लघु एवं सीमांत कृषकों,अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला कृषकों को 75 प्रतिशत और अन्य को 70 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा हैं।
इस जोनल कॉन्फ्रेंस में गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित पांच राज्यों के कृषि मंत्री, प्रमुख सचिव, सचिव, निदेशक और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
सम्मेलन के अंतर्गत विभिन्न विषयगत सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख योजनाओं एवं मिशनों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – तिलहन (एनएमईओ-ओएस) के अंतर्गत देश में तिलहन उत्पादन में वृद्धि एवं खाद्य तेलों पर आयात निर्भरता में कमी लाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। मिशन के तहत वर्ष 2030-31 तक उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि, क्षेत्र विस्तार तथा उत्पादकता में सुधार के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम कृषि पद्धतियों की प्रस्तुति भी दी जाएगी। इसमें राजस्थान द्वारा माइक्रो इरिगेशन मॉडल, गुजरात द्वारा बागवानी क्षेत्र में नवाचार, महाराष्ट्र द्वारा एग्री-स्टैक के उपयोग, मध्य प्रदेश द्वारा उर्वरक वितरण प्रणाली में सुधार तथा गोवा द्वारा प्राकृतिक खेती से संबंधित पहलें शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, नकली कीटनाशकों एवं उर्वरकों पर नियंत्रण, उर्वरकों की कालाबाजारी की रोकथाम, संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने तथा वैकल्पिक उर्वरकों के प्रचार-प्रसार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री द्वारा प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी, जिसमें सम्मेलन के प्रमुख निष्कर्षों से अवगत कराया जाएगा। समापन सत्र में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा चर्चाओं का सार प्रस्तुत किया जाएगा तथा विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों द्वारा अपने विचार व्यक्त किए जाएंगे।
