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विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त पर अन्नाद्रमुक ने राज्यपाल से की सीबीआई जांच की मांग

Date : 30-May-2026

 चेन्नई, 30 मई। तमिलनाडु की राजनीति में विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रमुख विपक्षी दल अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) ने सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) पर गंभीर आरोप लगाते हुए राज्यपाल से मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है।

अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को चेन्नई के गिंडी स्थित राजभवन में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कथित हॉर्स ट्रेडिंग की निष्पक्ष जांच, राज्य के मुख्य सचिव और विधानसभा सचिव से रिपोर्ट तलब करने तथा पूरे मामले को सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है।

प्रतिनिधिमंडल में अन्नाद्रमुक विधायक एग्री कृष्णमूर्ति, राज्यसभा सदस्य एम. थंबीदुरई, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धनपाल समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल थे।

अन्नाद्रमुक के नेताओं का आरोप है कि सत्तारूढ़ दल विपक्षी विधायकों को राजनीतिक और अन्य प्रकार के प्रलोभन देकर अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहा है। पार्टी का कहना है कि विपक्षी विधायकों से लगातार संपर्क कर उन्हें दल बदलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।

विधायक एग्री कृष्णमूर्ति ने दावा किया कि पार्टी छोड़ने वाले कुछ विधायकों को टीवीके की ओर से विभिन्न प्रकार के प्रलोभन दिए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अन्य अन्नाद्रमुक विधायकों को भी दल बदलने के लिए प्रभावित करने की कोशिशें जारी हैं।

दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। पहली बार चुनावी मैदान में उतरी टीवीके ने 108 सीटों पर जीत दर्ज कर राजनीतिक हलकों को चौंका दिया। इसके बाद कांग्रेस, वीसीके, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग तथा वामपंथी दलों के समर्थन से टीवीके ने सरकार बनाई।

वहीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) को 59 सीटें और अन्नाद्रमुक को 47 सीटें मिलीं। सरकार गठन के बाद विधानसभा में हुए विश्वास मत के दौरान अन्नाद्रमुक के कुछ विधायकों द्वारा सरकार के समर्थन में मतदान किए जाने से पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही कि सरकार के समर्थन में मतदान करने वाले कुछ विधायक एस.पी. वेलुमणि और सी.वी. शन्मुगम गुट से जुड़े थे। विश्वास मत के बाद पार्टी के चार विधायकों ने इस्तीफा देने और टीवीके में शामिल होने का निर्णय लिया, जिससे अन्नाद्रमुक के भीतर राजनीतिक संकट और गहरा गया।

हालांकि बाद में एस.पी. वेलुमणि गुट के असंतुष्ट विधायकों ने अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए पार्टी में एकजुटता बनाए रखने पर सहमति जताई। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व का आरोप है कि सत्तारूढ़ दल विपक्षी विधायकों को अपने पक्ष में करने के प्रयास जारी रखे हुए है।

अन्नाद्रमुक ने अपने ज्ञापन में तमिलनाडु सचिवालय के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया है। पार्टी का आरोप है कि सचिवालय का इस्तेमाल सरकारी कार्यों के बजाय राजनीतिक गतिविधियों और दलगत हितों के लिए किया जा रहा है।

पार्टी नेताओं ने आशंका जताई कि विपक्षी विधायकों को प्रभावित करने और उनकी राजनीतिक निष्ठा बदलने के प्रयासों में सरकारी संसाधनों का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने इस पहलू की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए एग्री कृष्णमूर्ति ने कहा कि अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के निर्देश पर यह शिकायत दर्ज कराई गई है। उन्होंने बताया कि पार्टी ने राज्यपाल से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 167 के अंतर्गत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

कृष्णमूर्ति ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों और विधायिका की गरिमा की रक्षा के लिए जरूरी है कि विपक्षी विधायकों को प्रभावित करने के किसी भी प्रयास को रोका जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

अन्नाद्रमुक की शिकायत के बाद तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इस मुद्दे को लोकतंत्र और राजनीतिक नैतिकता से जोड़कर उठा रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल की ओर से अभी तक आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मामले की औपचारिक जांच शुरू होती है, तो इसके राज्य की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। फिलहाल सभी की निगाहें राज्यपाल की प्रतिक्रिया और संभावित जांच संबंधी निर्णय पर टिकी हुई हैं। यदि राज्यपाल राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगते हैं या किसी जांच की अनुशंसा करते हैं, तो यह मामला तमिलनाडु की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन सकता है।


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