केले के पेड़ से मूर्ति निर्माण की अनोखी परंपरा, अद्भुत है नैनीताल का नंदा देवी महोत्सव | The Voice TV

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केले के पेड़ से मूर्ति निर्माण की अनोखी परंपरा, अद्भुत है नैनीताल का नंदा देवी महोत्सव

Date : 02-Sep-2024

उत्तराखंड के नैनीताल में 8 सितंबर से नंदा देवी महोत्सव की शुरुआत होने जा रही है. इस भव्य महोत्सव का आयोजन नैनीताल की सबसे पुरानी संस्था श्री राम सेवक सभा द्वारा विगत कई सालों से निरंतर किया जा रहा है. इस दौरान नैनीताल स्थित नयना देवी मंदिर में कुमाऊं की अधिष्ठात्री देवी मां नंदा सुनंदा की मूर्ति तैयार की जाती है | 

पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार मां नंदा सुनंदा के पीछे जब भैसा पड़ गया था तो उनकी रक्षा केले के पेड़ ने की थी. तबसे ही केले का पेड़ मां नंदा सुनंद से जुड़ा हुआ है. केले का पेड़ बेहद शुद्ध होता है. जिस वजह से ही मां की मूर्तियों का निर्माण केले से किया जाता है. वहीं, तकनीकी आधार पर केले में नौ प्रकार की देवियों का स्वरूप भी माना जाता है | 

ऐसे में नंदाष्टमी के दिन मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कर भक्तों के दर्शन के लिए खोली जाती है. क्या आपको पता है कि नंदा सुनंदा की मूर्तियों का निर्माण खास कदली के पेड़ से किया जाता है. जिसे महोत्सव के शुरुआत में ही नैनीताल के निकटवर्ती जगह से लाया जाता है. जहां पूरे शहर में शोभा यात्रा निकालकर अंत में नयना देवी मंदिर प्रांगण में भक्तों के दर्शन के लिए रखा जाता है | 
मां नंदा देवी महोत्सव के उद्घाटन के दिन ही एक दल केले का पेड़ लेने जाता है. जबकि दूसरे दिन केले के पेड़ को नगर में लाया जाता है. पूरे शहर में केले के पेड़ की शोभा यात्रा निकाली जाती है. मान्यता है कि मां नंदा सुनंदा केले के रूप में आती हैं. जिसके बाद केले के पेड़ की प्राण प्रतिष्ठा कर इस दिन रात्रि से ही मूर्ति निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाती है. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में मां नंदा सुनंदा की मूर्ति को दर्शन के लिए मंदिर प्रांगण में स्थापित किया जाता है | 

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