राष्ट्रवादी विचारधारा के परिपालक व बहुसंख्य हिंदू समाज में राममंदिर आंदोलन के माध्यम से जागरूकता उत्पन्न करने वाले विश्व हिंदू परिषद के संस्थापक अशोक सिंहल के अथक प्रयास, समर्पित व्यक्तित्व व ओजस्वी उद्बोधनों का ही परिणाम है कि आज हिंदू समाज में सामाजिक एकता का भाव दिखायी पड़ता है। 27 सितम्बर 1926 को आगरा में जन्में अशोक सिंघल के पिता एक सरकारी दफ्तर में कार्यरत थे। बाल अवस्था से लेकर युवावस्था तक अंग्रेज शासन को देख कर बड़े हुए और उसी दौरान वे 1942 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गये। 1975 से 1977 तक देश में आपातकाल और संघ पर प्रतिबन्ध रहा इस दौरान अशोक सिंघल इंदिरा गांधी की शासक के विरुद्ध हुए संघर्ष में लोगों को जुटाते रहे। आपातकाल के बाद वे दिल्ली के प्रान्त प्रचारक बनाये गये। 1981 में डा. कर्ण सिंह के नेतृत्व में दिल्ली में एक विराट हिन्दू समारोह हुआ, पर उसके पीछे शक्ति अशोक सिंघल जी और संघ की थी। उसके बाद अशोक सिंघल जी को विश्व हिन्दू परिषद् के काम में लगा दिया गया।
इसके बाद परिषद के काम में धर्म जागरण, सेवा, संस्कृत, परावर्तन, गोरक्षा.. आदि अनेक नये आयाम जुड़े। इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण है श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आन्दोलन, जिससे परिषद का काम गाँव-गाँव तक पहुँच गया। इसने देश की सामाजिक और राजनीतिक दिशा बदल दी। भारतीय इतिहास में यह आन्दोलन एक मील का पत्थर है।
1992 का राम जन्म भूमि आंदोलन
1984 में दिल्ली के विज्ञान भवन में एक धर्म संसद का आयोजन किया गया। सिंघल जी इस के मुख्य संचालक थे। विज्ञान भवन से हीं राम जन्म भूमि आंदोलन की रणनीति तय की गई। यहीं से सिंघल ने पूरा योजना बनाना शुरू किया और कर सेवकों को अपने साथ जोड़ना शुरू किया। 1992 में बाबरी मस्जिद तोड़ने वाले कर सेवकों का नेतृत्व सिंघल जी ने ही किया था।
सिंघल ने देश भर से 50 हजार करसेवक जुटाये। सभी करसेवकों ने राम जन्म भूमि पर राम मंदिर स्थापना करने की कसम देश की प्रमुख नदियों के किनारे खायी। बात अगर सिंघल की करें तो उन्होंने अयोध्या की सरयु नदी के किनाने राम लला की मूर्ति स्थापित करने का संकल्प लिया था। सिंघल ने एक इंटरव्यू में कहा था, "अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिये हमने अपना सब कुछ समर्पित कर दिया। रही बात मस्जिद तोड़ने की तो हम मस्जिद तोड़ने के मकसद से नहीं गये थे। उस दिन जो कुछ भी हुआ वह मंदिर के पुनरनिर्माण कार्य का एक हिस्सा था।"
विश्व हिंदू परिषद में सबसे बड़ा योगदान सिंघल का अशोक सिंघल परिषद के काम के विस्तार के लिए विदेश प्रवास पर जाते रहे हैं। इसी वर्ष अगस्त सितम्बर में भी वे इंग्लैंड, हालैंड और अमरीका के एक महीने के प्रवास पर गये थे। परिषद के महासचिव श्री चम्पत राय जी भी उनके साथ थे। पिछले कुछ समय से सांस की बीमारी की पीड़ित थे । इसी के चलते 17 नवम्बर, 2015 को दोपहर में गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में उनका निधन हो गया ।
