एक बालक था | उसकी उम्र बारह वर्ष थी | उसे घूमना बहुत अच्छा लगता था | उसे नई-नई चीजें खरीदने का बहुत शौक था | दिवाली के दिन नजदीक आ गए | दुकानें सजने लगीं | उसका मन बाजार घुमने के लिए मचलने लगा | उसने मां से कुछ पैसे मांगे | मां अपने बेटे की आदत जानती थी | उसने उसे ढेर सारे पैसे दे दिए |
बालक दिवाली के बाजार में मनपसंद चीजें खरीदने चल पड़ा | बाजार पहुंचने से पहले ही उसे एक भिखारी मिला | वह सड़क के किनारे बैठा था | बालक ने सोचा कि ये लोग भीख क्यों माँगते हैं | क्या ये कुछ काम नहीं कर सकते | वह भिखारी को ध्यान से देखने लगा | भिखारी ने अपने दोनों हाथ फैलाए हुए थे | वह कह रहा था –‘’जो दे उसका भी भला, जो ना दे उसका भी भला |’’
उसके हाथ में उंगलियां नहीं थीं | उसकी नाक बिल्कुल चपटी थी | पैरों से वह चल नहीं सकता था | वह आंखों से देख नहीं सकता था | बालक की समझ में आ गया कि वह भीख क्यों मांग रहा है | वह कोई काम नहीं कर सकता | किसने बनाया इसे ऐसा | बालक की आंखों में अब दीवाली की मिठाईयां या खिलोंनों के सपने नहीं थे | उसकी आंखों में आंसू थे | उसने अपना दाहिना हाथ बढ़ाया और सारे पैसे भिखारी के डिब्बे में डाल दिए | बालक दिवाली के बाजार तक नहीं पहूंचा | वह वापस घर लौट आया | मां ने पूछा –‘’क्या सभी पैसे खर्च कर दिए ?’’
बालक ने उत्तर दिया-‘’हां मां |’’
मां ने इधर-उधर देखा और पूछा –‘’ कौन-सा खिलौना खरीदा ?’’
बालक चुप हो गया | मां को संदेह हुआ-‘’ क्या सब पैसों की मिठाई खा ली ?’’ मां ने पूछा |
बालक ने तुरन्त उत्तर दिया- ‘’हां मां, बहुत अच्छी मिठाई थी |’’
मां समझ रही थी कि बालक झूठ बोल रहा है | मां के पूछने पर बालक ने मां को सच्ची बात बताई| मां की आंखों में आंसू आ गए| मां ने बालक को गले से लगा लिया | यह बालक आज बाबा आमटे के नाम से जाना जाता है |
