किसी जंगल में कौवों की सभा हो रही थी | उनके सरदार ने कहा –‘जंगल के इन पेड़ों पर हमारा अधिकार है |’
एक कौवे ने शिकायत की – ‘सरदार, यहां शिकारियों का आना-जाना शुरू हो गया है| उन्होंने हमारे अनेक साथियों को मार डाला है | हमें अपना ठिकाना बदल लेना चाहिए |’
दूसरे ने कहा –‘पर वे हमारा मांस नहीं खाते, फिर भी हमें क्यों मारते हैं|’
तीसरे कौवे ने उत्तर दिया- ‘वे शौक के लिए हमें अपना शिकार बनाते हैं और उनके कुत्ते हमें खा जाते हैं |'
सरदार कौवे ने सबकी बातें सुनीं | वह सोचने लगा कि शिकारियों का मुकाबला कैसे किया जाए | सभी कौवें सरदार की ओर देख रहे थें | सरदार बड़ा समझदार तथा बहादुर था | ठिकाना बदलकर वह शिकारियों से हार नहीं मानना चाहता था | पर दूसरी ओर उसके साथी मारे जा रहे थें | उसे उनकी भी चिंता थी | कुछ देर सोचकर सरदार बोला – ‘हमें शिकारियों का मुकाबला करना होगा |’
एक बार तो सभी चुप हो गए | सब भयभीत हो उठे | सरदार ने फिर उंचे स्वर में कहा-‘हम एक होकर मुकाबला करेंगे |’
धीरे-धीरे सभी कौवों में शिकारियों से मुकाबले का साहस पैदा हो गया | एक कौवे ने जोर से कहा – सरदार हम तैयार हैं |’
सभी ओर से आवाज आई –‘हम तैयार हैं |’
सरदार की आंखों में चमक आ गई | उसने जोश में भरकर कहा–‘हम शिकारियों का मुकाबला करेंगे | हम सब एक होकर उन पर हमला करेंगे | हम निडरता से उनका सामना करेंगे |’
बूढ़े सरदार ने हमला करने की योजना बनाई | सरदार ने सभी योजना समझाई | सभी ने योजना समझी |
अगले दिन सभी तैयार थे | शिकारियों का समूह प्रात:काल ही वहां आ पहुंचा | पेड़ों के पास उन्होंने तम्बू गाड़ दिए | थोड़ी देर उन्होंने वहां आराम किया | उसके बाद कुछ शिकारी दूसरी दिशाओं में शिकार करने चले गए और कुछ वहीं रह गए | इनमें से कुछ ने दोपहर का खाना बनाना शुरू किया और कुछ अपनी-अपनी बंदूक साफ करने लगे |
सभी कौवे पेड़ों के पत्तों की आड़ में छिपे बैठे थे | वे सरदार के इशारे का इंतजार कर रहे थे | सरदार का इशारा हुआ |
सभी कौवे कांव-कांव करते शिकारियों पर टूट पड़े | इतने कौवों को देख शिकारी घबरा उठे | कौवों ने पहला हमला उनके हाथों पर किया | उनके हाथों से खून टपकने लगा | वे बंदूक छोड़कर इधर-उधर भागने लगे | कौवों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा | कौवों ने उनकी आंखों पर हमला किया | उनके सिरों को अपनी चोंच से फोड़ डाला | कौवों ने शिकारियों का शिकार किया |
दूसरी दिशाओं में गए शिकारी शाम को लौटे | उन्होंने अपने साथियों को मरा देखा तो वे घबरा गए | कौवों ने उनका भी पीछा किया | अपने साथियों के शवों को लेकर वे वहां से भाग निकले | इसके बाद शिकारी कभी वहां नहीं आए |
कौवों की एकता ने उनके ठिकाने की रक्षा की |
और कहां देखा ! एकता में कितना बल है |
