राहुल गांधी; तुम देश की अर्थव्यवस्था पर रहम करो, क्यों इसे नीचे गिराना चाहते हो? Date : 08-Jun-2024 राहुल गांधी ने एक बार फिर देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में पहल की है, क्या एक सांसद को जिसके बारे में बताया गया है कि उसने अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी और फिर लंदन में एक मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म मॉनिटर ग्रुप के साथ अपना प्रोफेशनल सफर शुरू किया। भारत लौटने के बाद अपनी एक टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग फर्म Backops Services Private Ltd शुरू की, जिसके डायरेक्टर खुद राहुल गांधी बने, अब क्या उन्हें इतना भी नहीं पता है कि शेयर मार्केट जोखिमों के अधीन है? व्यक्ति को अपना रिस्क स्वयं से उठाना होता है। आर्थिक लाभ यदि हुआ तो वह उसका है और नुकसान भी हुआ तो भी वह उसके स्वयं के लिए गए निर्णय पर आधारित है, इसके लिए किसी को दोष नहीं दिया जा सकता, फिर भी वे पत्रकारों के बीच शेयर मार्केट के नीचे जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दोषी ठहरा रहे हैं। दरअससल, इससे लगता यही है कि वे पिछली एनडीए-नीत भाजपा की मोदी सरकार को लेकर आमजन के बीच फैलाए गए तमाम झूठ के बाद अब देश के उद्योग-व्यापार से जुड़े वर्ग को भ्रमित कर देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं, ताकि भविष्य में नई गठित सरकार पर वे अधिक आक्रामक हो सकें। लेकिन अपने राजनीतिक सत्ता के स्वार्थ के चलते वे ये नहीं सोचना चाह रहे आखिर इससे नुकसान किसका होगा? एक सशक्त विपक्ष देश ने इंडी गठबंधन के रूप में दिया है, फिर क्यों वह भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने पर तुले हैं ? हद है, झूठ, कपट और छल की! इस पत्रकार वार्ता में एक घटना और घटी है, वह देश के एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान के संवाददाता के साथ राहुल गांधी द्वारा उसके कार्य को लेकर खड़े किए गए प्रश्न से जुड़ी। संवाददाता ने संसद में हंगामे को लेकर प्रश्न क्या किया, राहुल मंच से भाजपा की टीशर्ट पहन लेने की सलाह देने लगे! निश्चित ही यह मीडिया का बड़ा अपमान है, क्योंकि प्रश्न करना प्रत्येक मीडिया कर्मी का अधिकार है, जब कांग्रेस का सामर्थ्य ही नहीं, प्रश्नों के उत्तर देने का धैर्य नहीं, तब फिर प्रेस वार्ता बुलाने की जरूरत ही क्यों है? इससे एक बात तो साफ हो गई है कि राहुल अब जो कर रहे हैं वह चुनाव सम्पन्न होने से भी ज्यादा भयंकर है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि कांग्रेस की सीटें बढ़ने से उनमें अहंकार भी बढ़ गया है, वह किसी से भी कुछ बोल रहे हैं! यहां वापिस मुद्दे पर आते हैं । बात शेयर मार्केट के नीचे जाने और इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी को आरोपित करने की हो रही है। राहुल का आरोप है, 'प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, उनके लिए काम कर रहे एग्जिट पोल्स्टर्स और मित्र मीडिया ने मिलकर देश के सबसे बड़े 'स्टॉक मार्केट स्कैम' की साजिश रची है। 5 करोड़ छोटे निवेशक परिवारों के 30 लाख करोड़ रुपये डूब गए हैं। इसलिए जेपीसी गठित कर इस 'क्रिमिनल एक्ट' की जांच की जाए। जिन फर्जी चुनावी एजेंसियों ने गलत एग्जिट पोल्स दिए उनकी भी इस घोटाले में भूमिका है। इसकी जांच के लिए एक जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) गठित की जानी चाहिए।' राहुल के इस बयान के तीन मुख्य अर्थ निकल रहे हैं । एक कि मोदी-शाह ने एक बड़ा स्कैम किया है, दो इसमें मीडिया भी शामिल है, तीन, एग्जिट पोल्स करनेवाली एजेंसियां भी इस स्कैम को रचनेवाली हैं और सबसे बड़ी बात यह कि राहुल इस पूरे घटनाक्रम को बड़े 'स्टॉक मार्केट स्कैम' व 'क्रिमिनल एक्ट' करार दे रहे हैं। ऐसे में आज यह जरूरी हो जाता है कि राहुल गांधी से यह जरूर पूछना चाहिए कि जो निवेशक थे, वह क्या मीडिया संस्थानों और पत्रकारों से पूछ-पूछ कर कंपनियों के शेयर खरीद रहे थे? जिन एग्जिट पोल्स एजेंसियों को राहुल जूठा करार दे रहे हैं, सच तो यह है कि वह भी असत्य साबित नहीं हुई हैं। अधिकांश ने यही तो कहा; सरकार एनडीए नीत मोदी की @ 03 बन रही है। सीट फिर भले ही कम-ज्यादा हुई हैं, किंतु सरकार तो भाजपा ही वापिस आई है। फिर एग्जिट पोल्स एजेंसियां पूरी तरह से गलत कैसे हैं? राहुल गांधी आज शेयर मार्केट को लेकर जो कह रहे हैं, आमजन एवं देश के उद्योग जगत के बीच धारणा इसके उलट भी तो हो सकती है, जो राहुल मतगणना के पहले तक कह रहे थे, ये एग्जिट पोल नहीं मोदी मीडिया पोल है। ये मोदी का पोल है। फैंटेसी पोल है। यहां इसका उलट भी तो हो सकता है, क्योंकि देश एक स्थायी और सशक्त सरकार चाहता है, इंडी गठबंधन जैसा माहौल बना रहा था और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रविवार (2जून) को इंडी गठबंधन को लेकर साफ बताया था, वे 295 सीटें जीत रहे हैं, तब यह संभावना क्यों नहीं हो सकती कि शेयर मार्केट राहुल के दावे स्थायी सरकार देने से ऊपर गया हो और जब बाजार ने देखा कि सरकार कमजोर बनने जा रही है तो शेयर धड़ाम हो गए हों। फिर क्यों न इस पूरे मामले में राहुल गांधी एवं इंडी गठबंधन के नेताओं को ही दोषी ठहराया जाए! जिन्होंने जीत के बड़े-बड़े दावे किए और आमजन को अपनी दम पर स्थायी सरकार देने का भरोसा दिया था? वैसे हाल ही में जो पीयूष गोयल ने कहा, यहां वही सबसे बड़ा सच है, उन्होंने कहा, कांग्रेस नेता निवेशकों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी के आरोप निराधार इसलिए हैं क्योंकि भारतीय खुदरा निवेशक भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों के बाजार पूंजीकरण में 2014 में ₹67-लाख करोड़ से बढ़कर अब ₹415-लाख करोड़ कमाने पर आ गए हैं, कहना होगा कि यह मोदी के शासन के दस सालों की देन है। इसी वक्त में भारतीय खुदरा निवेशक सबसे बड़े लाभार्थी रहे भारतीय निवेशकों ने वास्तव में चुनावी मतगणना के दिन सहित पिछले कुछ दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव से (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की कीमत पर) व्यापारिक लाभ कमाया है। उन्होंने कहा कि गांधी मूल्यांकन (बाजार पूंजीकरण) के नुकसान का जिक्र कर रहे थे, जो उन दिनों लेनदेन किए गए शेयरों के मूल्य से लाभ या हानि से अलग था। यहां कोई राहुल गांधी से यह जरूर पूछे; जब 2004 में शेयर बाजार में 129 साल के इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट आई थी, जिसके कारण कारोबार कई बार रोक देना पड़ा था, क्योंकि निवेशक इस बात को लेकर भारी चिंतित थे कि कम्युनिस्ट पार्टियां, सोनिया गांधी की आगामी गठबंधन सरकार की नीति को कैसे प्रभावित करेंगी, तब क्या राहुल गांधी आज उस दौर में जो कई हजार करोड़ का देश के आम नागरिकों को नुकसान हुआ था, उसके लिए देश से माफी मांगेंगे? या उसकी जांच की मांग भी कभी करेंगे? क्योंकि तत्कालीन समय में शेयर बाजार की कीमतें खुलने के 20 मिनट के भीतर ही 10 प्रतिशत से अधिक गिर गईं। आगे फिर बार-बार गिरती हुई देखी गईं। अभी हाल ही में पिछले तीन दिन लगातार मार्केट ने जो वापिसी की है, उसका श्रेय क्या बड़े मन से नए एनडीए गठबंधन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राहुल गांधी देंगे? क्यों कि मार्केट को फिर से पंख लग गए हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों वाले दिन मार्केट करीब 12 फीसद गिरा था, किंतु देश की राजनीतिक स्थिति साफ होते ही अगले ही दिन मार्केट ने रिकवर करना शुरू कर दिया और एक ही दिन में निवेशकों को करीब 8 लाख करोड़ रुपये का फायदा पहुंचा । क्या राहुल गांधी और उनके समेत पूरी कांग्रेस केंद्र में फिर से मोदी सरकार के आने के मजबूत संकेत को देखते हुए शेयर मार्केट में यह बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, उसके लिए भाजपा और मोदी का आभार व्यक्त करेंगे? फिलहाल तो शेयर मार्केट ने दोबारा 75 हजार का आंकड़ा पार कर लिया है । दो दिन में ही निवेशकों को 21 लाख करोड़ रुपये का फायदा हुआ है। दो दिनों में यह 3000 अंक चढ़ चुका है 4 जून को मार्केट बंद होने के बाद बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का ओवरऑल मार्केट कैप 394 लाख करोड़ रुपए था। जो अब 415 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। अभी भारतीय बेंचमार्क सूचकांक सकारात्मक रुख के साथ कारोबार कर रहे हैं। बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी में सात जून को भी 1% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने वित्त वर्ष 2025 की अपनी दूसरी बैठक में रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया। क्या राहुल गांधी इस ताजा अपडेट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उनकी आर्थिक नीतियों के लिए पूरे एनडीए की प्रशंसा करने का सामर्थ्य रखते हैं ? लेखक -डॉ. मयंक चतुर्वेदी