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"स्वाधीनता के राष्ट्र नायक सुभाष बाबू को जीते जी क्यों मारा गया ?"

Date : 20-Aug-2024

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के तथाकथित बलिदान दिवस पर शत् शत् नमन है-सुभाष बाबू के विरुध्द गाँधीजी और उनकी समर्थक कांग्रेस लाॅबी के षड्यंत्र से षड्यंत्र भी शर्मिंदा है  - "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा" - काश! आपको मिले नेतृत्व में भारत पल्लवित और पुष्पित होता तो कोलकाता जहाँ माँ दुर्गा का माहात्म्य है , एक महिला मुख्यमंत्री ममता दीदी हैं, वहाँ डॉ. मौमिता देवनाथ के साथ ये दुष्कर्म और वीभत्स हत्या न होती फिर न्याय के लिए भटकना न पड़ता , परंतु नेताजी आपके न रहने पर भारत में एक ऐंसे व्यक्ति को सत्ता प्राप्ति की आड़ में राष्ट्र का रोल मॉडल बना डाला, जिसने केवल हिन्दुओं को अहिंसा का पाठ पढ़ाकर - पढ़ाकर हिन्दुओं की दुर्दशा करवा दी जबकि दूसरी ओर इसी व्यक्ति ने प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजों का भरपूर साथ दिया और तो और सार्जेंट बनकर सैनिक भर्ती कराए तब इनकी अहिंसा कहाँ चली गई थी?यह व्यक्ति मुसलमानों की हिन्दुओं पर की गई हिंसा और बलात्कार को जायज बताता है, और केवल हिन्दुओं को अहिंसा का पाठ पढ़ाता है ? 

त्रिपुरी अधिवेशन में चुनाव के उपरांत भारत का नेतृत्व गाँधी जी और उनकी समर्थक कांग्रेस लाॅबी के हाथ से निकल गया क्योंकि अकेले सुभाष चंद्र बोस ने पट्टाभि सीतारमैय्या सहित इन सबको 203 मतों से धराशायी करते हुए भारत का नेतृत्व प्राप्त कर लिया परंतु फिर सुभाष बाबू को तबाह करने के लिए गांधी जी, कांग्रेस और अंग्रेजों ने मिलकर ऐंसे षड्यंत्र रचे हैं कि षड्यंत्र भी शर्मसार हो जाएगा। अब ये चित्र दुर्लभ हैं, और ऐंसी इच्छा शक्ति भी दुर्लभ है कि 105 डिग्री बुखार में स्ट्रेचर में लेटे - लेटे त्रिपुरी अधिवेशन में आए और फिर विष्णुदत्त नगर पहुंच कर अचेत होने तक भाषण भी दे - तो ये सुभाष चन्द्र बोस के अलावा और कौन हो सकता है? कैंसे स्वीकार करें?सुभाष बाबू कि आज आपका महा बलिदान दिवस है | क्या आप विमान हादसे में? या किसी गहरी साजिश का शिकार हुए?क्या आपकी आजाद हिंद सेना से सभी थर्रा गये थे? इंग्लैंड के पूर्व प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने क्यों स्वीकार किया था कि हमारा भारत छोड़ने का प्रमुख कारण आजाद हिंद सेना थी? आजाद हिंद सेना के कारण ब्रिटिश भारत की सेनाओं में विद्रोह के स्वर क्यों गूंजने लगे थे?

सच तो ये है कि महात्मा गाँधी के आंदोलनों की असफलता से लोग विशेषकर युवा ऊब गये थे और वो अब सुभाष बाबू के साथ जाना चाहते थे.. शेष प्रश्नों के उत्तर आप समझ ही गये होंगे.. परंतु आज उनके तथाकथित बलिदान दिवस पर शत् शत् नमन करते हुए |जबलपुर में उनके सर्वशक्तिमान स्वरुप की स्वर्णिम यादें इतिहास संकलन समिति महाकोशल प्रांत की ओर से प्रस्तुत कर रहा हूँ |क्यों था त्रिपुरी अधिवेशन1939 (जबलपुर) स्वाधीनता संग्राम के इतिहास का भूकंप? तत्कालीन विश्व की राजनीति का सबसे घातक बयान था "पट्टाभि की हार मेरी(व्यक्तिगत)हार है"..महात्मा गाँधी..गाँधी जी जान गये थे की देश की युवा पीढ़ी और नेतृत्व सुभाष चन्द्र बोस के हाथ में चला गया है अब क्या किया जाए? इसलिए उक्त कूटनीतिक बयान दिया गया.. अब त्रिपुरी काँग्रेस अधिवेशन में पट्टाभि की हार को गाँधी जी ने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था.. इसलिए कांग्रेस की कार्य समितियों ने सुभाष चंद्र बोस के साथ असहयोग किया (यह अलोकतांत्रिक था परंतु गांधी जी का समर्थन था और यही तानाशाही भी) साथ ही सुभाष बाबू को गांधी जी के निर्देश पर काम करने के लिए कहा गया, जबकि अध्यक्ष सुभाष चन्द्र बोस थे। सुभाष बाबू का विचार था कि अब अंग्रेजों को 6माह का अल्टीमेटम दिया जाए कि वो भारत छोड़ दें.. इस बात पर गांधी जी और उनके समर्थकों के हांथ - पांव फूल गए, उधर अंग्रेजों भी भारी तनाव में आ गए और अंग्रेजों ने गांधी जी और कांग्रेस पर दवाब डाला की सुभाष बाबू का असहयोग किया जाए.. इसलिए एक गहरी साजिश के चलते सुभाष बाबू का विरोध किया गया और अंतत:सुभाष बाबू ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया... सुभाष बाबू ने कहा था कि द्वितीय विश्व युद्ध आरंभ होने वाला इसलिए यही सही समय है जब अंग्रेजों से आरपार की बात की जाए परंतु गांधी जी और उनके तथाकथित चेलों ने विरोध किया.. सच तो ये है कि सुभाष बाबू की बात मान ली गई होती तो देश 7वर्ष पहले 1940 तक स्वाधीन हो जाता और विभाजन की विभीषिका नहीं देखनी पड़ती.. इस्तीफे के बाद भी सुभाष बाबू चरमोत्कर्ष हुआ, उन्होंने 60 हजार योद्धाओं के साथ आजाद हिंद सेना का निर्माण किया और भारत की ओर कूच किया |आजाद हिंद सेना के जवानों से हुए दुर्व्यवहार से बरतानिया सेना भी स्वतंत्रता संग्राम का उद्घोष कर दिया, जिसके दवाब में अंग्रेज भारत छोड़ने के लिए बाध्य हुए..|

लेखक - डॉ. आनंद सिंह राणा

 


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