आरक्षण: देश के माथे पर कलंक
Date : 07-Sep-2024
आरक्षण जिस समय देश में लागू किया गया था उस समय की स्थिति कुछ अलग थी। डॉ भीमराव अंबेडकर जो कि भारतीय संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। वह स्वयं एक उच्च शिक्षित विद्वान, राष्ट्रभक्त थे। देश के अंदर समाज के कुछ हिस्से को पिछड़ा अथवा समाज की मुख्य धारा से कुछ पीछे जानकर डॉ. अंबेडकर द्वारा आरक्षण का संविधान में प्रावधान किया गया। भारत के संविधान में आरक्षण Reservation का प्रावधान मात्र 10 वर्ष के लिए लागू किया गया था। डॉ. अंबेडकर ने एक बार कहा था - " जिस दिन भारत में कोई एससी/ एसटी देश का राष्ट्रपति बन जाएगा। उस दिन आरक्षण समाप्त कर दिया जाए।"
Sc , St, Obc वर्ग के समाज को राजनीतिक पार्टियों ने चारा बना लिया है। यह राजनीतिक दल दलित, अनुसूचित जाति ,जनजाति, पिछड़ा वर्ग के बंधुओं को जाति के आधार पर भड़काते/ लडाते रहते हैं। स्वयं को उनका हितैषी दिखाकर उनका वोट बैंक के आधार पर शोषण करते रहते हैं। जातिगत नेता आर्थिक आधार पर समृद्ध होते चले जा रहे हैं किंतु उसी जाति की जनता गरीब, असहाय, बेबसी का जीवन जी रही है। कुछ खानदानी राजनीतिक दल के नेता विगत 70 वर्षों से गरीबी दूर करने का नारा लगाते चल आ रहे हैं, अपनी राजनीति चमका रहे हैं ,राजनीतिक रोटियां सेंकते चले आ रहे हैं किंतु जनता का कोई भला नहीं हुआ। उसका जीवन स्तर वहीं के वहीं है। नेता 5-10 साल में करोड़पति/ अरबपति बन जाता है किंतु वोटर (मतदाता) वहीं का वहीं रहता है। अतः अब जनता को जागना चाहिए । नेता व पार्टी का चारा बनने से बचना चाहिए। आखिर यह लूट का खेल कब तलक चलेगा? हमारे दलित जनजाति के बंधु कब इस कुचक्र से बाहर निकलेंगे? आखिर वह कब समझेंगे कि उन्हें ठगा/ लूटा जा रहा है। उन्हे निकम्मा बनाया जा रहा है, उनकी मौलिक /प्राकृतिक क्षमता को समाप्त किया जा रहा है। ठीक उसी तरह से जैसे की एक तोते को पकड़ कर पिंजरे में कुछ दिन के लिए बंद कर देते हैं व फ्री में इस पिंजरे में दाना -पानी डालते रहते हैं। फिर कुछ दिन बाद वह तोता पिंज्डा खोल देने पर भी उड़ नहीं पता है। क्योंकि उसकी उड़ने की क्षमता समाप्त कर दी गई है । बेचारा वह तोता अब गुलामी का जीवन जीने मजबूर है; क्योंकि वह बेबश/ लाचार हो गया है। उसकी उड़ान की क्षमता समाप्त हो चुकी है। ऐसा ही आरक्षण में मुफ्त का अनाज/ सुविधा देकर व्यक्ति की मौलिक क्षमता समाप्त कर दी गई है। अब वह आरक्षण कोटे के राशन- पानी पर जीवित है। केवल तोते का जीवन (गुलामी) जी रहा है। क्या नैतिक दृष्टि से यह अन्याय नहीं है???
जगतगुरु -विश्वगुरु रहा है। भारतवर्ष के निवासियों को दुनिया में भूसुर (देवता) के नाम से पुकारा (जाना) जाता था। जो देश कभी यहां ज्ञान- विज्ञान, कला ,दर्शन के क्षेत्र में विश्व का सिरमौर रहा हो, जिसने संपूर्ण मानव जाति को "जीवन जीने की कला" Art of living का शिक्षण दिया था। जिस देश में 7 चक्रवर्ती सम्राट हुए जिन्होंने संपूर्ण पृथ्वी पर चक्रवर्ती शासन किया था। जिस देश के राजा महाराजा दशरथ, मुचकुंद धरती से स्वर्ग के राजा इंद्र की सहायता करने जाते थे। जो देश ऋषियों -मुनियों ,ज्ञानियों ,ध्यानियों ,ब्रह्म्ं ऋषियों, योगी -यतियों का है। जिनके लिए संपूर्ण ब्रह्मांड/ सृष्टि में कुछ भी दुर्लभ, असाध्य, अप्राप्त, अलभ्य नहीं रहा। जो भारत भूमि ,पुण्यभूमि, मोक्षभूमि, अवतारों की भूमि है। जहां श्रीराम -श्रीकृष्ण जैसे महापुरुषों/ भगवान ने जन्म लिया। ऐसी दिव्य, वन्दन, अभिनंदन की भूमि पर आज पापाचार, अत्याचार ,अन्याय हो रहा है तो यह चुल्लू भर पानी में डूब मरने वाली बात है, बड़ी ही निंदनीय,अशोभनीय, गरिमा के प्रतिकूल बात है।