करनी हो जन सेवा, रक्त-दान ही है उत्तम सेवा | The Voice TV

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"जिन्दगी के लक्ष्य में प्राप्ती करते समय सिर्फ 2 सोच रखनी चाहिए, अगर रास्ता मिल गया तो ठीक, नहीं तो रास्ता में खुद बना लूँगा।"

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करनी हो जन सेवा, रक्त-दान ही है उत्तम सेवा

Date : 14-Jun-2023

 

जो अन्न दे वह अन्नदाता,
धन दे वह धनदाता,
जो विद्या दे वह विद्यादाता,
पर जो रक्त दे वह जीवनदाता

शरीर के सुचारू रूप से कार्य करने के लिए खून की जरूरत होती है। अगर शरीर में खून की कमी हो जाए तो व्यक्ति का जीवन खतरे में पड़ सकता है। इसलिए लोगों से रक्तदान की अपील की जाती है। अगर रक्तदाता दिवस के इतिहास के बारे में बात किया जाये तो इसकी शुरुआत  कार्ल लैंडस्टीनर की जयंती  के रूप में मनाया जाता है  इनका जन्म 14 जून 1968 को हुआ था  तथा इन्होंने  ,बी ,ओ, ब्लड ग्रुप सिस्टम की खोज कर विज्ञान  मैं उनके अपार योगदान के लिए  नोबेल पुरस्कार सम्मानित भी किया गया था  और सन 2004 में  डब्ल्यूएचओ द्वारा  पहली बार विश्व रक्तदाता दिवस मनाया गया  ताकि  लोगों को रक्तदान करने के लिए  प्रोत्साहित किया जा सके और ब्लड बैंकों में पर्याप्त मात्रा में  रक्त उपलब्ध हो और तब से ही  हर वर्ष 14 जून को  रक्तदाता दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। इससे पहले ब्लड ट्रांसफ्यूजन बिना ग्रुप के जानकारी में होता था। हालांकि दुनिया का पहला रक्त आधान 1665 में माना जाता है जिसे इंग्लैंड में फिजिशियन रिचर्ड लोअर ने किया था। रिचर्ड ने दूसरे कुत्तों के रक्त को एक कुत्ते में ट्रांसफर करके उसकी जान बचाई थी। कार्ल लैंडस्टीनर ने पता लगाया कि एक व्यक्ति का खून बिना जांच के दूसरे को नहीं चढ़ाया जा सकता है क्योंकि सभी मनुष्य का ब्लड ग्रुप अलग होता है। कार्ल लैंडस्टीनर का तर्क था कि दो व्यक्तियों के विभिन्न ब्लड ग्रुप संपर्क में आने के साथ रक्त अणुओं पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

·         1900-1901 दौरान कार्ल लैंडस्टीनर ने इंसानी खून के ए,बी,ओ, रक्त समूह और रक्त में मिलने वाले एक अहम तत्व आरएच फैक्टर की खोज की।

·         1930 में नोबल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

·         अपनी महान खोज के कारण उन्हें ट्रांसफ्यूजन मेडिसन का पितामह भी कहा जाता है।

·         1818 में, ब्रिटिश प्रसूति विशेषज्ञ जेम्स ब्लंडेल ने सब से पहले रक्तदान की बात किया

·         कोलकाता, पश्चिम बंगाल में पहला ब्लड बैंक स्थापित किया गया था।

·         भारत में सबसे पहले रक्तदान लीला मूलगांवकर ने 1954 किया

·         भारत में सबसे अधिक 248 बार रक्तदान करने वाले शख्स हरीशभाई पटेल हैं|

रक्त-दान से जुड़ी 5 बातें हमेशा रखें याद

·  रक्त-दान करने के फायदे: रक्तदान करने से आपके भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य को लाभ होता है। मेंटल हेल्थ फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार ब्लड       डोनेट कर दूसरों की मदद करने से तनाव कम होता है।

· रक्त-दान से जुड़े कुछ फैक्ट: डोनर के शरीर से सिर्प एक यूनिट ब्लड ही लिया जा सकता है, एक आम व्यक्ति के शरीर में 10 यूनिट(5 से 6 लीटर) ब्लड होता           है,18 से 60 वर्ष की आयु तक कोई भी ब्लड डोनेट कर सकता है।

· अगर आप किसी तरह के वायरस से पीड़ित हैं तो ब्लड रक्त दान न करें। जैसे एचआईवी (एड्स), टीबी, हेपेटाइटिस, सिफलिस से पीड़ित लोगों को ब्लड डोनेशन     की मनाही होती है।

· बता दें कि 'O नेगेटिव' ब्लड ग्रुप यूनिवर्सल डोनर होते है। ये किसी भी ब्लड ग्रुप के व्यक्ति खून दे सकते हैं। भारत में केवल 7 प्रतिशत लोगों का ब्लड ग्रुप 'O             नेगेटिव' है।

·   रक्तदान के बाद कुछ व्यक्तिओ को कमजोरी का एहसास हो सकता है। 3 घंटे तक भारी काम न करें और पौष्टिक आहार ले


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