09 दिसंबर । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत हर चुनौती का सामना करने की सामर्थ्य रखता है और वंदे मातरम् की भावना इस शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वंदे मातरम् केवल गीत या ऋचा नहीं, बल्कि कर्तव्य-प्रेरणा का सशक्त स्रोत है, जो आत्मनिर्भर भारत के सपने को दिशा देता है। प्रधानमंत्री लोकसभा में राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई चर्चा में बोल रहे थे। उन्होंने याद दिलाया कि बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने यह गीत 1875 में लिखा था।
श्री मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् ने स्वतंत्रता आंदोलन में ऊर्जा और चेतना पैदा की तथा देश की आजादी की लड़ाई में यह प्रेरक मंत्र बना। उन्होंने उल्लेख किया कि सौवीं वर्षगांठ के समय देश आपातकाल के संकट से गुजर रहा था, जब इस गीत के उत्सव को दबा दिया गया और देशभक्ति की आवाज़ें कैद कर दी गईं। प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश शासन के अत्याचारों के दौर में रचे गए इस गीत को भारत की गहन सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 1937 में मुस्लिम लीग ने वंदे मातरम् का विरोध तेज किया और आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस विरोध के आगे झुककर राष्ट्रीय गीत पर अनावश्यक समझौता किया। उन्होंने दावा किया कि मोहम्मद अली जिन्ना द्वारा किए गए विरोध के कुछ ही दिनों बाद कांग्रेस ने जिन्ना की आलोचना करने के बजाय वंदे मातरम् की समीक्षा शुरू कर दी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि वंदे मातरम् देश के वर्तमान, अतीत और भविष्य का अभिन्न हिस्सा है और इसने स्वाधीनता सेनानियों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने की शक्ति दी। उन्होंने कहा कि 1905 के बंगाल विभाजन के समय भी इस गीत ने व्यापक जनजागरण उत्पन्न किया और इतिहास में इसे वह सम्मान नहीं मिला जिसका यह हकदार है।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि वंदे मातरम् देश की आत्मा है और हर भारतीय इसे गाते हुए गर्व महसूस करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस चर्चा के जरिए बेरोजगारी और महंगाई जैसे असल मुद्दों से ध्यान हटाया जा रहा है। पार्टी नेता गौरव गोगोई ने कहा कि प्रधानमंत्री ने चर्चा को अनावश्यक राजनीतिक रंग देने की कोशिश की।
समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने कहा कि वंदे मातरम् की भावना सांप्रदायिक राजनीति से ऊपर है और यह लोगों को एकजुट करने वाली प्रेरणा है। तृणमूल कांग्रेस, जदयू, तेदेपा, शिवसेना सहित कई दलों के नेताओं ने भी गीत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता पर अपने विचार रखे।
भाजपा के अनुराग ठाकुर ने वंदे मातरम् को वेद, कुरान और बाइबिल जितना पवित्र बताते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर सवाल उठाया। लोजपा के राजेश वर्मा ने कहा कि इस गीत ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ करोड़ों भारतीयों को एक किया।
चर्चा की शुरुआत में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि वंदे मातरम् ने औपनिवेशिक दमन के खिलाफ संघर्ष में उम्मीद की किरण जगाई। उन्होंने बताया कि कुल 66 सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया और सदन देर रात तक राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक विरासत पर एकजुट होकर विचार-विमर्श करता रहा। इसके बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।