अपनी मातृभूमि के लिए आखिरी सांस तक बहादुरी से लड़ने वाले महाराणा प्रताप जयंती | The Voice TV

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अपनी मातृभूमि के लिए आखिरी सांस तक बहादुरी से लड़ने वाले महाराणा प्रताप जयंती

Date : 09-Jun-2024

 

महाराणा प्रताप भारत के सबसे बहादुर राजपूत शासकों में से एक थे |  जिन्होंने लगभग 35 वर्षों तक राजस्थान के मेवाड़ पर शासन किया| हल्दीघाटी और देवर की लड़ाई में अपनी अहम भूमिका के लिए जाने जाने वाले, महाराणा प्रताप भारत के उन राजाओं में से एक थे जो मुगल साम्राज्य के खिलाफ खड़े हुए |

 महाराणा प्रताप का प्रारंभिक जीवन 

महाराणा प्रताप 9 मई, 1540 को राजस्थान के कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ था। उनका जन्म हिन्दी तिथि के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। उनके पिता महाराजा उदयसिंह और माता राणी जीवत कंवर थीं। वे राणा सांगा के पोते थे। महाराणा प्रताप का बचपन का नाम ‘कीका’ था। महाराणा प्रताप का नाम भारत माता के सच्चे सपूत के रूप में लिया जाता है जिन्होंने कभी घास से बनी रोटी खाने का विकल्प चुना | किन कभी भी दुश्मन के आगे घुटने नहीं टेके |

कैसे हुआ उनका राजतिलक

महाराणा प्रताप का राजतिलक गोगुंदा, उदयपुर में हुआ था। राणा प्रताप के पिता उदयसिंह ने अकबर से भयभीत होकर मेवाड़ त्याग कर अरावली पर्वत पर डेरा डाला और उदयपुर को अपनी नई राजधानी बनाया था। तब मेवाड़ भी उनके पास ही था। महाराणा प्रताप हिस्ट्री हिंदी के अनुसार महाराणा उदयसिंह ने अपनी मृत्यु के समय अपने छोटे पुत्र को गद्दी सौंप दी थी जोकि नियमों के विरुद्ध था। में आप जानेंगे कि उदयसिंह की मृत्यु के बाद राजपूत सरदारों ने मिलकर 1628 फाल्गुन शुक्ल 15 अर्थात 1 मार्च 1576 को महाराणा प्रताप को मेवाड़ की गद्दी पर बैठाया।  

उनका घोड़ा चेतक

के इस ब्लॉग में आपको चेतक के बारे में भी जानने को मिलेगा। चेतक, महाराणा प्रताप का सबसे प्रिय घोड़ा था। चेतक में संवेदनशीलता, वफ़ादारी और बहादुरी की भरमार थी। यह नील रंग का अफ़गानी अश्व था। वह हवा से बाते करता था। चेतक की बदौलत उन्होंने अनगिनत युद्ध जीते थे। हल्दी घाटी के युद्ध में चेतक काफी घायल हो गया था। लड़ाई के दौरान एक बड़ी नदी आ जाने से चेतक को लगभग 21 फिट की चौड़ाई को लांघना था। महाराणा प्रताप हिस्ट्री हिंदी के अनुसार चेतक प्रताप की रक्षा के लिए उस दूरी को लांघ देता है लेकिन घायल होने के कारण कुछ दुरी के बाद अपने प्राण त्याग देता हैं। 21 जून 1576 को चेतक प्रताप का साथ छोड़ जाता है। चेतक की मृत्यु से प्रताप पहले जैसा नहीं रहता है।

अंतिम समय

महाराणा प्रताप का निधन 57 वर्ष की आयु में 19 जनवरी 1597 को हो गया था। वह जंगल में एक एक दुर्घटना की वजह से घायल हो गए थे। कई इतिहासकारों का मानना है कि हल्दीघाटी के युद्ध के बाद महाराणा प्रताप ने मेवाड़ धरा को स्वतंत्र कराया और यही कारण है कि आज तक कोई भी महाराणा प्रताप को नहीं हरा पाया।

आज के मौके पर जानिए उनसे संबंधित कुछ दिलचस्प बातें

1. इतिहासकारों के अनुसार, महान राजपूत शासक प्रताप सिंह की लंबाई सात फीट और पांच इंच थी जबकि उनका वजन लगभग 110 किलोग्राम था. 

2. बताया जाता है कि राणा प्रताप 104 किलोग्राम वजन वाली दो तलवारें उठाकर चल सकते थे. कहा जाता है कि उनके कवच का वजन करीब 72 किलोग्राम था जबकि वह 80 किलोग्राम का भाला लेकर  चलते थे |

3. ज्यादातर राजपूत शासकों ने मुगलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था और अकबर के साथ संधि कर ली थी. पर महाराणा प्रताप पश्चिमी भारत में एकमात्र राजा थे जो  उनके खिलाफ खड़े रहे. अपनी आखिरी सांस तक वह मुगलों के खिलाफ लड़े |

4. अपने साहस के लिए जाने जाने वाले, महाराणा प्रताप को भारत का पहला "मूल स्वतंत्रता सेनानी" कहा जाता है क्योंकि वह मुगलों के खिलाफ खड़े हुए और अकबर की सेनाओं से बहादुरी से लड़े|

5. महाराणा प्रताप भले ही हल्दीघाटी की लड़ाई हार गए पर इस बहादुर राजपूत शासक ने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया था. कहा जाता है कि महाराणा प्रताप को बंदी बनाना अकबर का सपना था लेकिन वह अपने जीवनकाल में ऐसा करने में सफल नहीं हो सके. गोगुन्दा और बूंदी सहित सभी राजपूत राजवंशों ने अकबर के सामने आत्मसमर  कर दिया था, इसके बाद भी प्रताप ने कभी भी अकबर के सामने सिर नहीं झुकाया|

6. चित्तौड़ को मुक्त कराना महाराणा प्रताप का सपना था और इसलिए उन्होंने प्रतिज्ञा की कि जब तक वह चित्तौड़ को वापस नहीं जीत लेते तब तक पत्तल पर खाएंगे | और जमीन पर सोएंगे. आज भी कुछ राजपूत महान महाराणा प्रताप के सम्मान में अपनी थाली के नीचे एक पत्ता और अपने बिस्तर के नीचे पुआल रखते हैं|

7. महाराणा प्रताप का अपने वफादार घोड़े चेतक के साथ अनोखा रिश्ता था| हल्दीघाटी की लड़ाई के दौरान चेतक ने महाराणा प्रताप की घातक चोटों के बावजूद उनकी जान बचाई थी. बाद में, कई हिंदी लेखकों और कवियों ने उनकी बहादुरी का वर्णन करते हुए चेतक के बारे में लिखा |

8. महाराणा प्रताप ने अपने जीवनकाल में बहुत से युद्ध लड़े और जब उनकी मृत्यु हुई तो इस खबर ने अकबर को भी रुला दिया         


 


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