काठमांडू, 12 मार्च । नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. बाबूराम भट्टराई ने भारत और चीन के बीच नेपाल को पुल का काम करने के लिए तैयार रहने की बात कही है। भट्टराई ने नेपाल में उभर रहे जेन-जी और युवा नेतृत्व पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि नेपाली युवा देश को समृद्धि की दिशा में आगे ले जाने में पूरी तरह सक्षम हैं।
डॉ. भट्टराई ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे NXT कॉन्क्लेव के दौरान प्रधानमंत्री स्तरीय राउंड टेबल सत्र में नेपाल की भू-राजनीतिक स्थिति और युवा नेतृत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अब नेपाल को केवल दो महाशक्ति देशों के बीच की दबाव में फंसे देश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका तर्क था कि नेपाल को दो उभरती हुई बड़ी शक्तियों के बीच एक गतिशील सेतु (पुल) की भूमिका निभानी चाहिए।
बदलती वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कहा कि छोटे देशों के लिए अपनी रणनीति में परिवर्तन लाना अनिवार्य हो गया है। प्रौद्योगिकी के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे “वसुधैव कुटुम्बकम्” यानी पूरी दुनिया एक परिवार की अवधारणा को व्यवहार में लागू करना आसान हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल को भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और विकास से पर्याप्त लाभ उठाने में सक्षम होना चाहिए।
उनके अनुसार दक्षिण एशिया में गरीबी और अस्थिरता का मुख्य कारण संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि कमजोर संस्थागत संरचना और शासन की विफलता है। अपने संबोधन में भट्टराई ने इस बात पर जोर दिया कि दक्षिण एशियाई देशों को विकास के लिए आपस में घनिष्ठ सहयोग बढ़ाना चाहिए और वैश्विक साझेदारी के अवसरों का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में नेपाल जैसे देशों के लिए रणनीतिक रूप से स्वयं को परिस्थितियों के अनुसार ढालना ही समझदारी होगी। डॉ. भट्टराई के साथ इस सत्र में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट के मॉरिसन और स्वीडन के पूर्व प्रधानमंत्री फ्रेडरिक रेनफेल्ड की उपस्थिति रही।
