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संसद हमला बरसी: 13 दिसंबर, जब आतंकियों ने लोकतंत्र के मंदिर पर किया था हमला

Date : 13-Dec-2025

13 दिसंबर। साल था 2001… तारीख थी 13 दिसंबर। राष्ट्रीय राजधानी में कड़ाके की ठंड थी और संसद में शीतकालीन सत्र चल रहा था। सदन के भीतर महिला आरक्षण विधेयक को लेकर हंगामा हो रहा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और नेता प्रतिपक्ष सोनिया गांधी संसद भवन से निकल चुके थे। किसी ने भी यह कल्पना नहीं की थी कि चंद ही मिनटों में भारत के लोकतंत्र के केंद्र पर ऐसा आतंकी हमला होगा, जो पूरे देश को झकझोर कर रख देगा।

आतंकियों के पास एके-47 समेत कई अत्याधुनिक हथियार थे

सुबह करीब 11:30 बजे एक सफेद एंबेसडर कार संसद भवन के गेट नंबर 12 से भीतर दाखिल हुई। कार के प्रवेश करते ही सुरक्षा कर्मियों को संदेह हुआ और वे उसके पीछे दौड़ पड़े। इसी दौरान कार उपराष्ट्रपति की खड़ी गाड़ी से टकरा गई। टक्कर होते ही कार सवार आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। आतंकियों के पास एके-47 समेत कई अत्याधुनिक हथियार थे। देखते ही देखते पूरा संसद परिसर गोलियों की गूंज से दहल उठा।

संसद भवन में गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी समेत कई वरिष्ठ नेता थे मौजूद

अचानक हुए इस हमले से संसद में अफरातफरी मच गई। सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत अलर्ट जारी किया और सीआरपीएफ की बटालियन ने मोर्चा संभाल लिया। उस समय संसद भवन में गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी समेत कई वरिष्ठ नेता और पत्रकार मौजूद थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी को अंदर ही रहने के निर्देश दिए गए और संसद परिसर को पूरी तरह सील कर दिया गया।

आतंकी गेट नंबर 4 की ओर बढ़े, जहां मुठभेड़ में तीन को मार गिराया गया

इस दौरान एक आतंकी गेट नंबर 1 से सदन में घुसने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सुरक्षा बलों ने उसे वहीं ढेर कर दिया। इसके बाद चार अन्य आतंकी गेट नंबर 4 की ओर बढ़े, जहां मुठभेड़ में तीन को मार गिराया गया। आखिरी आतंकी गेट नंबर 5 की ओर भागा, लेकिन वह भी कुछ ही मिनटों में सुरक्षा बलों की गोलियों का शिकार हो गया।

मुठभेड़ सुबह 11:30 बजे शुरू हुई और शाम करीब 4 बजे तक चली

यह मुठभेड़ सुबह 11:30 बजे शुरू हुई और शाम करीब 4 बजे तक चली। देश के जांबाज सुरक्षाकर्मियों की बहादुरी और त्वरित कार्रवाई के कारण उस दिन एक बड़ा हादसा टल गया।

15 दिसंबर 2001 को अफजल गुरु, एसएआर गिलानी, अफशान गुरु और शौकत हुसैन हुए गिरफ्तार

संसद पर हमले के दो दिन बाद, 15 दिसंबर 2001 को अफजल गुरु, एसएआर गिलानी, अफशान गुरु और शौकत हुसैन को गिरफ्तार किया गया। मामले की सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने एसएआर गिलानी और अफशान गुरु को बरी कर दिया, जबकि अफजल गुरु को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। वहीं शौकत हुसैन की सजा को मौत से घटाकर 10 वर्ष कर दिया गया।

9 फरवरी 2013 को अफजल गुरु को दिल्ली की तिहाड़ जेल में सुबह 8 बजे दी गई फांसी 

9 फरवरी 2013 को अफजल गुरु को दिल्ली की तिहाड़ जेल में सुबह 8 बजे फांसी दी गई। इस आतंकी हमले में दिल्ली पुलिस के पांच बहादुर जवान, सीआरपीएफ की एक महिला सुरक्षाकर्मी, राज्यसभा सचिवालय के दो कर्मचारी और एक माली शहीद हुए। संसद पर हुआ यह हमला भारत के इतिहास की सबसे गंभीर आतंकी घटनाओं में से एक माना जाता है।


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