नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से अदालत के इनकार को खरगे ने सत्य की जीत बताया | The Voice TV

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नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से अदालत के इनकार को खरगे ने सत्य की जीत बताया

Date : 17-Dec-2025

नई दिल्ली, 17 दिसंबर । नेशनल हेराल्ड धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से दिल्ली की अदालत के इनकार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे न्याय और सत्य की जीत बताया है।

खरगे ने बुधवार को दिल्ली में अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अदालत के फैसले का स्वागत किया और भाजपा सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि नेशनल हेराल्ड केस पूरी तरह राजनीतिक बदले और द्वेष की भावना से गढ़ा गया फर्जी मामला है, जिसका मकसद कांग्रेस नेताओं, खासकर गांधी परिवार को परेशान करना था।

खरगे ने कहा कि नेशनल हेराल्ड की स्थापना वर्ष 1938 में स्वतंत्रता सेनानियों ने की थी। भाजपा सरकार, सीबीआई और ईडी जैसी संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल कर इसे मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोपों से जोड़कर बदनाम करने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह पूरा मामला सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए खड़ा किया गया। नेशनल हेराल्ड केस में सच्चाई कुछ भी नहीं है। फिर भी वर्षों तक कांग्रेस नेताओं को पूछताछ और कार्रवाई के नाम पर प्रताड़ित किया गया।

इस मौके पर वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि नेशनल हेराल्ड का मामला न केवल द्वेष से प्रेरित है, बल्कि कानूनी तौर पर भी बेहद कमजोर और लापरवाही से भरा हुआ है। 2014 में सुब्रमण्यम स्वामी की एक निजी शिकायत से यह मामला शुरू हुआ और 2014 से 2021 तक सीबीआई और ईडी ने अपनी फाइलों में लिखित रूप से माना कि इसमें कोई प्रेडिकेट ऑफेंस नहीं बनता। इसी वजह से सात साल तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद जून 2021 में अचानक ईसीआईआर दर्ज की गई, जो यह साफ दिखाता है कि यह फैसला राजनीतिक दबाव में लिया गया। साल 2021 से 2025 के बीच सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई कांग्रेस नेताओं से लगभग 90 घंटे पूछताछ की गई। कई संपत्तियां अटैच की गईं, खातों को फ्रीज किया गया और यहां तक कि किराये की आमदनी तक रोक दी गई, जबकि अंत में अदालत ने साफ कहा कि धनशोधन के लिए जरूरी प्रेडिकेट ऑफेंस मौजूद ही नहीं है।

सिंघवी ने कहा कि अदालत का यह आदेश एजेंसियों के दुरुपयोग का सबसे बड़ा प्रमाण है। आपराधिक कानून कोई प्रेस विज्ञप्ति नहीं है, जिसे राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाए। इस मामले में न तो एक पैसा इधर-उधर हुआ और न ही किसी संपत्ति का स्वामित्व बदला। एजेएल आज भी अपनी सभी अचल संपत्तियों की मालिक है और यंग इंडियन एक नॉन-प्रॉफिट कंपनी है, जहां किसी तरह का व्यक्तिगत लाभ, वेतन या मुनाफा लेने का कोई प्रावधान नहीं है।


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