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एकता, संस्कार और प्यार की भाषा है हिंदी : प्रो. योगेश सिंह

Date : 07-Jan-2026

 नई दिल्ली, 07 जनवरी । दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के हिंदी माध्यम कार्यान्वयन निदेशालय ने बुधवार को विश्वविद्यालय के सर शंकरलाल सभागार में ‘अभिप्रेरणा कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 351 एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप हिंदी माध्यम में उच्च शिक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक ग्रंथों के विस्तार के लिए शिक्षाविदों को प्रेरित करने पर केंद्रित इस कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों के अनेक शिक्षकों और शोधार्थियों ने भागीदारी की।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे डीयू के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि हिंदी जन-जन की भाषा है, मन की भाषा है। यह एकता, संस्कार और प्यार की भाषा है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि कॉलेजों के डीन प्रो. बलराम पाणि, निदेशक दक्षिण परिसर प्रो. रजनी अब्बी और सलाहकार समिति की अध्यक्ष प्रो. सुधा सिंह उपस्थित रहें।

प्रो. योगेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सरकारों का सहयोग हो तो अच्छा न हो तो भी हिंदी आगे बढ़ते रहेगी, यह हिंदी की सहजता और सरलता है। उन्होंने हिंदी भाषा को बढ़ाने की समूहिक जिम्मेवारी लेते हुए कहा कि यह काम हम सबका है।

कुलपति ने कहा कि प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और शिक्षा मंत्री का हिंदी भाषी न होते हुए भी हिंदी के प्रति सम्मान अविस्मरणीय है। किसी व्यक्ति के मन को जीतना हो, समाज को जीतना हो, तो सबसे पहले आपको उनकी भाषा का सम्मान करना होगा। कोई भी प्रयास जो हिंदी को बढ़ाने का कार्य करता है, वह अभिनंदनीय है। जिस भाषा को बोलने वाले जितने अधिक होंगे वह भाषा उतनी ही समृद्ध होगी।

प्रो. योगेश सिंह ने हिंदी में पाठ्य-पुस्तकों की आवश्यकता एवं अनुसंधान संभावनाओं पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी भाषा में मौलिक पुस्तक - लेखन की आवश्यकता है, क्योंकि अच्छा लेखक पुस्तक को रुचिकर बनाता है। अच्छी फिल्म बनाना और अच्छी किताब लिखना एक ही बात है। उन्होंने कहा कि जब स्कूली शिक्षा हिंदी माध्यम में संभव है तो उच्च शिक्षा में क्यों नहीं यह सोचने का विषय है, इसलिए एक साल में निदेशालय को 100 अच्छी पुस्तकें लिखने का संकल्प लेना चाहिए।

इस कार्यक्रम के दौरान निदेशालय की निदेशक प्रो. मंजु मुकुल कांबले ने कहा कि अगर समाज को मजबूत करना हो तो पहले हमें भाषा को मजबूत करना होगा। भाषाओं की मजबूती केवल साहित्य तक सीमित नहीं है। उन्होंने पूर्व में रहे सभी निदेशकों का स्मरण करते हुए हिंदी माध्यम कार्यान्वयन निदेशालय के समृद्ध इतिहास को याद किया।

प्रो. मंजु मुकुल कांबले ने बताया कि निदेशालय ने गत छह दशकों में 150 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन कर हिंदी माध्यम की सामग्री को समृद्ध किया है।

इस अवसर पर आगामी योजनाओं को रेखांकित करते हुए निदेशालय ने अपील किया कि दिल्ली विश्वविद्यालय एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रोफेसर्स, शिक्षक और शोधार्थी हिंदी माध्यम में पाठ्य-पुस्तक लेखन, अनुवाद एवं संपादन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हिंदी माध्यम न केवल विकल्प के रूप में, बल्कि एक सक्षम और समृद्ध व्यवस्था के रूप में स्थापित हो सके।


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