नई दिल्ली, 03 फ़रवरी । लोकसभा में मंगलवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी के वक्तव्य में एक बार फिर पूर्वी लद्दाख का विषय आने पर सदन में हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष का कहना था कि लोकसभा अध्यक्ष के व्यवस्था देने के बावजूद राहुल गांधी फिर वही मुद्दा उठा रहे हैं। वहीं, विपक्ष ने दावा किया कि राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जा रहा है।
लोकसभा में सत्ता पक्ष और कांग्रेस सांसदों के हंगामे के चलते कार्यवाही पहले दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित की गई। इसके बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। इसी बीच 3 बजे कार्यवाही प्रारंभ होने पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अमर्यादित व्यवहार के लिए 6 सांसदों को निलंबित करने का प्रस्ताव रखा। इसे ध्वनिमत से स्वीकार कर लिया गया और सांसद मणिकम टैगोर, राजा वारिंग, गुरजीत औजला, हिबी ईडन, किरन रेड्डी, वेंकट रमन को सत्र की कार्यवाही से निलंबित कर दिया गया।
लोकसभा की कार्यवाही सुबह दो बार स्थगित हुई। इसके बाद दोपहर 2 बजे प्रारंभ होने के बाद पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपना वक्तव्य देने के लिए कहा। साथ ही उन्होंने अनुरोध किया कि वे केवल इसी विषय पर अपनी बात रखें।
राहुल गांधी ने अपने वक्तव्य की शुरुआत एक पत्रिका के एक लेख को सत्यापित करने से की। उन्होंने उसकी प्रति भी सौंपी। लेख पूर्व सेना अध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब पर आधारित था। इसके बाद उन्होंने इससे जुड़ा विषय सदन में उठाना चाहा।
राहुल के वक्तव्य पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जाहिर करते हुए कहा कि हम विपक्ष के नेता की बात सुनने के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं। वहीं, जिस विषय का अभी संदर्भ दिया गया था, उस पर अध्यक्ष पहले ही निर्णय दे चुके हैं। उनका कहना है कि जब किसी विषय पर पहले ही निर्णय दिया जा चुका हो और वही विषय कल संदर्भित किया गया हो तो उसी विषय को फिर से परोक्ष रूप से उद्धृत नहीं किया जा सकता। उसी मुद्दे का दोबारा उल्लेख नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर राहुल गांधी ने कहा कि वे विपक्ष के नेता हैं और उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है।
