नई दिल्ली, 16 मई । गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) के यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स ने “भारतीय ज्ञान परंपरा: निरंतरता, विच्छेद और समन्वय” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया।
यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स की प्रभारी प्रो. क्वीनि प्रधान ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) के विकसित हो रहे क्षेत्र के इर्द-गिर्द आलोचनात्मक संवाद के लिए विभिन्न अनुशासनात्मक पृष्ठभूमियों के विद्वानों, शोधकर्ताओं और छात्रों को एक मंच पर लाना था।
सम्मेलन में कई प्रतिष्ठित विद्वानों और प्रख्यात बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। उद्घाटन सत्र में प्रख्यात बुद्धिजीवी एवं आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी उपस्थित रहे।
डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कला की सर्वव्यापकता और दैनिक जीवन की लय में ज्ञान परंपरा को उजागर करने पर बल दिया। प्रख्यात विज्ञान इतिहासकार प्रो. दीपक कुमार ने मुख्य भाषण दिया और सभी प्रकार के स्वदेशी ज्ञान के सम्मान की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स का वार्षिक न्यूजलेटर ‘नवकृति’ भी जारी किया गया।
उद्घाटन सत्र के बाद राजनीतिक वैज्ञानिक प्रो. मधुलिका बनर्जी और समाजशास्त्री प्रो. विवेक कुमार की अध्यक्षता में विशेष संबोधन और तकनीकी सत्र आयोजित हुए।
सम्मेलन के दूसरे दिन विविध प्रस्तुतियों पर गहन चर्चाएं हुईं। साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के संकाय प्रो. देव नाथ पाठक, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. मणिंद्र नाथ ठाकुर और गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के प्रो. विवेक सचदेवा के बीच हुई गोलमेज चर्चा उपस्थित जनों के लिए विशेष आकर्षण रही।
सम्मेलन के दो दिनों के दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित विभिन्न विषयों और उप-विषयों पर आयोजित तकनीकी सत्रों में पूरे भारत से 30 से अधिक विद्वानों और शोधकर्ताओं ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
