मंदिर श्रृंखला:- निरई माता Date : 12-Aug-2024 मान्यता है कि हर धार्मिक स्थल का अपना एक अलग रहस्य और महत्व होता है जो उस स्थल को बाकि धार्मिक स्थल से अलग बनाता है | भारत में ऐसे अनेक स्थलों में से एक है निरई माता मंदिर जो छत्तीसगढ़ में स्थित है | अपनी प्राकृतिक सौन्दर्यता के लिए विख्यात छत्तीसगढ के मोहेरा गांव के पहाड़ों के ऊपर बसी माता का दर्शन वर्ष में केवल एक बार ही होता है | यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन चैत्र नवरात्र के प्रथम रविवार को 4 घंटे के लिए ही खुलता है। यहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित हैं। चैत्र नवरात के प्रथम रविवार को इस स्थान में जात्रा का त्यौहार मानाया जाता है जिसमें लोग अपनी मनोकामना पूर्ण होने की कामना करते हैं। मनोकामना पूर्ण होने के पश्चात् पुनः एक वर्ष पश्चात् इस स्थान पर आकर माता के चरणों में अपनी शक्ति और सामर्थ के अनुसार श्रीफल, दशमद का फूल, नीबू और अन्य फल प्रसाद स्वरूप चढ़ाकर उस पवित्र स्थान से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह मंदिर छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर स्थित है। यहां पूरे भक्ति भाव और पवित्र मन से ही पहुंचा जा जाता है। बिना तेल ही जलती है चमत्कारिक ज्योति ऐसी मान्यता है कि चैत्र नवरात्र में लगातार माता का चमत्कारिक ज्योति बिना तेल के 9 दिनों तक प्रज्वलित होती है। इस दैवीय चमत्कार की वजह से भी लोग देवी के प्रति अपार श्रद्धा और भक्ति रखते हैं। ज्योति कैसे प्रज्ज्वलित होती है, यह आज तक लोगों के लिए पहेली बनी हुई है। ग्रामीणों की मानें तो यह निरई देवी का ही चमत्कार है कि बिना तेल के ज्योति नौ दिनों तक जलती रहती है। महिलाओं को मंदिर में जाना वर्जित है यूं तो चैत्र नवरात्र में महिलाएं माता के इस पावन 9 दिनों तक व्रत रहती है। विशेष पूजा अर्चना करती है पर निरई माता मंदिर में महिलाओं के पूजा-अर्चना करने के लिए प्रवेश करना पूरी तरह से वर्जित है और यहां केवल पुरुष ही पूजा-पाठ की रीतियों को निभाते हैं।