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बजट : समृद्ध और सशक्त भारत बनाने पाँच ट्रिलियन डालर की अर्थ व्यवस्था बनाने की ओर

Date : 29-Jul-2024

 

वित्तमंत्री सुश्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2024-25 केलिये बजट प्रस्तुत किया । श्रीनरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कार्य कर रही वर्तमान सरकार के तीसरे कार्यकाल का यह पहला है । प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी ने यदि दो कार्यकाल पूरे करके लगातार तीसरे कार्यकाल केलिये पद दायित्व संभालकर नेहरू जी के कीर्तिमान की बराबरी करके इतिहास में अपना नाम जोड़ लिया है तो वित्तमंत्री सुश्री निर्मला सीतारमण ने भी लगातार सातवीं बार बजट प्रस्तुत किया है । यह भी कीर्तिमान है । लगातार सात केंद्रीय बजट पेश करने वाली वे देश की पहली वित्तमंत्री बन गईं हैं । इससे पहले छै बजट प्रस्तुत करने का कीर्तिमान तत्कालीन वित्तमंत्री श्री मोरारजी देसाई के नाम था । अब सुश्री निर्मला सीतारमण उनसे एक कदम आगे आ गई। केन्द्र सरकार का यह बजट पिछले अधिकांश बजट की प्राथमिकताओं से अलग है । यह बजट समृद्ध और सशक्त भारत बनाने की दिशा एक मजबूत कदम है । इस बजट में प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी के संकल्प और प्राथमिकता की स्पष्ट झलक है । श्रीनरेंद्र मोदी ने अपना पद संभालते ही भारत को आत्मनिर्भर और विश्व में सबसे विकसित और समृद्ध बनाने का संकल्प व्यक्त किया था । इसके लिये उन्होंने "ज्ञान का सम्मान" सूत्र दिया हो । मोदी जी के "ज्ञान" शब्द में गाँव, गरीब, किसान, युवा और महिला आते हैं। उनका मानना है कि इन वर्गों को सशक्त बनाने से ही समाज और देश सशक्त बनेगा । इस बजट में इन वर्ग समूहों को मजबूत करने को प्राथमिकता साफ झलक रही है । इसके लिये इस बजट में कुल नौ प्राथमिकताएँ निर्धारित की गई हैं।  इनमें कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाना, युवाओं के लिए रोजगार एवं उनका कौशल विकास, गरीब नागरिकों को विकास में सहभागी बनाना, सामाजिक न्याय, विनिर्माण इकाईयों को बढ़ावा देना, नगरीय विकास, ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा विकास, आधारभूत ढांचा विकास, शोध अनुसंधान करना प्रमुख हैं। इनमें भी गाँव, गरीब, कृषि, किसान, युवा रोजगार, नारी सशक्तीकरण पर अधिक जोर दिया गया है । भारत की अर्थ व्यवस्था का आधार गाँव, किसान और कृषि है । यदि कृषि और किसान समृद्ध होंगे तो देश का प्रत्येक क्षेत्र समृद्ध होगा। उद्योगों की समृद्धि में भी परोक्ष रूप से गाँव और किसान आधार होते हैं। परिवार की नींव महिला है तो रोजगार, परिश्रम, पुरुषार्थ और कौशल विकास युवकों का होना चाहिये । समृद्धि का आधार यही वर्ग समूह होते हैं । समृद्धि के साथ सुरक्षा के प्रबंध भी आवश्यक हैं। वित्त मंत्री सुश्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2024-25 के इस बजट में इन्हीं विषयों पर सबसे अधिक प्रवधान किये हैं ।
वर्ष 2024-25 केलिये बजट कुल व्यय 48,20,512 करोड़ रुपये अनुमानित है. इसमें से पूंजीगत व्यय 11,11,111 करोड़ है । वर्ष 2023-24 की तुलना में पूंजीगत व्यय 16.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्शा रहा है । जबकि वर्ष 2022-23 के बजट में 7.5 लाख करोड़ रुपए का और वित्तीय वर्ष 2023-24 में  10 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान था। अब इसे बढ़ाकर 11.11 लाख करोड़ रुपए किया गया है, जो सकल घरेलू उत्पाद का 3.4 प्रतिशत है। अनुमान है कि मार्च 2025 में ख़त्म हो रहे वित्त वर्ष में देश की विकास दर 6.5% से 7% के बीच रह सकती है । जो अमेरिका, फ्रांस ब्रिटेन जैसे विकसित राष्ट्रों की तुलना में अधिक रहने वाली है । वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल आय 31.07 लाख करोड़ रुपए का अनुमान है, इसमें ऋण की राशि शामिल नहीं है परंतु, करों से प्राप्त होने वाली 25.83 लाख करोड़ रुपए की राशि शामिल है कुल खर्च का अनुमान 48.21 लाख करोड़ रुपए का है। इस वित्तीय वर्ष में उर्वरक, पैट्रोलियम आदि विभिन्न सब्सिडी पर कुल 381175 करोड़ रुपये का  प्रावधान किया गया है । इसमें सर्वाधिक 2,05,250 करोड़ रुपये खाद पर, और उर्वरक पर 1,64,000 करोड़ रुपये और शेष पेट्रोलियम केलिये होगी । इनके अतिरिक्त केंद्र सरकार अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा टैक्स प्रशासन, जीएसटी क्षतिपूर्ति और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को हस्तांतरण पर भी खर्च करती है । बजट में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.9 प्रतिशत अनुमानित है । इसमें उधार को छोड़कर सरकार को कुल 32.07 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान हैं ।भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.5 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है । राजकोषीय घाटा सरकार की आय और व्यय के बीच का अंतर होता है । जो यह संकेत करता है कि सरकार को संबंधित वित्त वर्ष कितना ऋण लेने की आवश्यकता होगी ।
बजट में युवाओं को रोजगार और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है । वित्तमंत्री की घोषणानुसार आगामी पाँच वर्षों के दौरान एक करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप योजना के अंतर्गत काम दिया जाएगा। ताकि जरूरतमंद युवा रोजगार प्राप्त करने केलिये सक्षम बन सकें। इनको 6,000 रुपए तक प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि सम्बंधित कम्पनियों द्वारा दी जायेगी । इस राशि संबंधित कम्पनियों द्वारा सामाजिक दायित्व योजना के अंतर्गत किया गया व्यय माना जाएगा। इस योजना केलिये भारत की 500 कम्पनियों को चिन्हित किया जा रहा है । साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा भी इन युवाओं को प्रतिमाह 5000 रुपए भी किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त विनिर्माण के क्षेत्र के रोजगार सृजित करने की योजना पर काम करने की घोषणा की है। इस क्षेत्र में इन नए कर्मचारियों के खाते में जमा होने वाली राशि आगामी 4 वर्षों तक केंद्र सरकार द्वारा वहन की जायेगी । संभावना है कि इस योजना से 30 लाख युवाओं को लाभ होगा । एक अन्य योजना के अंतर्गत दो वर्षों तक नियोक्ता को ऐसे  कर्मचारियों के खातों में जमा की जाने वाली राशि की प्रतिपूर्ति केंद्र सरकार करेगी । इससे रोजगार के 50 लाख नए अवसर सृजित होने की सम्भावना है। बजट में युवाओं को रोजगार के नये अवसर सृजित करने के प्रावधानों के अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्र में भी रोजगार सृजित करने के प्रावधान इस बजट में किये गये हैं।  ताकि रोजगार की तलाश में गाँव से नगरों की ओर होने वाली दौड़ कुछ थम सके और गाँव के जरूरत मंदों को गाँव में ही रोजगार मिल सके । इसकेलिये ग्रामीण विकास की मद पर 2.66 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग को बढ़ावा देने केलिये मुद्रा लोन योजना में ऋण राशि की सीमा को 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपए की गई है। यह सुविधा उन व्यवसाईयों को प्राप्त होगी जिन्होंने पूर्व में लिए गए 10 लाख रुपए के ऋण को समय पर अदा किया है। इस बजट में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए भी ऋण की सीमा को बढ़ाकर 100 करोड़ रुपए तक कर दिया गया है। इससे एक ओर लघु एवं मध्ययम उद्योगों का विस्तार होगा जिसमें रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे और दूसरा कर्मशील युवा अपनी यूनिट डालने केलिये भी प्रेरित होंगे। 
 वित्तमंत्री सुश्री निर्मला सीतारमण ने आयकर अधिनियम 1961 की समीक्षा और सरलीकरण करने की घोषणा की । ताकि विवादों का निबटारा छै माह के भीतर हो सके । उन्होंने नई कर व्यवस्था के अंतर्गत मानक कटौती को पचास हजार रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये करने और तीन लाख वेतन पर कोई टैक्स नहीं लगने,  ई-कॉमर्स ऑपरेटरों पर टीडीएस की दर 1% से घटाकर 0.1% करने की घोषणा की । इसके साथ कुछ परिसंपत्तियों के लिए पूंजीगत लाभ पर टैक्स बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये करने, 7 से 10 लाख की आय पर 10 प्रतिशत, 10 से 12 लाख की आय पर 15 प्रतिशत और 15 लाख से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत टैक्स का प्रस्ताव किया । इससे इन कर्मचारियों को प्रतिवर्ष 17,500 रुपए का लाभ होगा। 

बजट में कुछ अन्य जन हितैषी घोषणाएँ 

वित्त मंत्री सुश्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में मोबाइल फोन, मोबाइल चार्जर, सोना, चांदी और अन्य पर मूल सीमा शुल्क में कटौती करने की घोषणा की । इससे घरेलू मोबाइल फोन उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और निवेश बढ़ने की संभावना है । इससे निर्माताओं की उत्पादन क्षमता और लाभ मार्जिन में सुधार होगा । वित्तमंत्री ने इस बजट में सोने और चांदी पर सीमा शुल्क घटाकर 6 प्रतिशत और प्लैटिनम पर 6.4 प्रतिशतशकरने की घोषणा की । इससे सोने और चांदी के आभूषण सस्ते होंगे। यह घोषणा महिलाओं के हित में मानी जा रही है । चूँकि आभूषण के प्रति आकर्षण महिलाओं में अधिक होता है । वित्तमत्री ने कैंसर के इलाज की तीन दवाओं को मूल सीमा शुल्क से छूट देने, सौर पैनलों के निर्माण में उपयोग की जाने वाली फेरोनिकेल, ब्लिस्टर कॉपर पर मूल सीमा शुल्क हटाने की भी घोषणा की । जबकि निर्दिष्ट दूरसंचार उपकरणों पर शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया है । वित्त मंत्री ने लिथियम सहित 25 महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आयात शुल्क छूट की भी घोषणा की । लिथियम इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी बनाने में उपयोग होता है । इसपर आयात शुल्क बढ़ने से  विद्युतीय वाहन निर्माण की गति तेज होगी । बजट में सरकार ने अमोनियम नाइट्रेट पर सीमा शुल्क बढ़ाकर 10 प्रतिशत और गैर-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक पर 25 प्रतिशत करने की घोषणा की गई। बजट में धार्मिक पर्यटन को देश में बढ़ावा देने के उद्देश्य से श्री विष्णुपाद मंदिर कोरिडोर, गया, बिहार एवं श्री महाबोधि मंदिर कोरिडोर बोधगया, बिहार को विकसित किए जाने की घोषणा की । इसे काशी विश्वनाथ मंदिर कोरिडोर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसी प्रकार देश में अन्य मंदिरों को भी विकसित किया जा रहा है।

विभिन्न विभागों केलिये प्रस्तावित राशि प्रावधान 

वित्त मंत्रालय को 1858158.52 करोड़, रक्षा मंत्रालय के लिये 621940.85 करोड़, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के लिये 278000.00 करोड़, रेल मंत्रालय के लिये 255393.00 करोड़, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के लिये  223323.36 करोड़, गृह मंत्रालय के लिये 219643.31 करोड़, ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिये 180233.43 करोड़, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय केलिये 168499.87 करोड़, संचार मंत्रालय के लिये 137293.90 करोड़, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के लिये  132469.86 करोड़, शिक्षा मंत्रालय के लिये 120627.87 करोड़, जल शक्ति मंत्रालय के लिये 98713.78 करोड़, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के लिये 90958.63 करोड़, आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय के लिये 82576.57 करोड़, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के लिये 26092.19 करोड़, परमाणु ऊर्जा विभाग केलिये 24968.98 करोड़, श्रम और रोजगार मंत्रालय के लिये 22531.47 करोड़, विदेश मंत्रालय के लिये 22154.67 करोड़, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय केलिये 22137.95 करोड़, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय केलिये 21936.90 करोड़, ऊर्जा मंत्रालय के लिये 20502.00 करोड़, नवीन और नवीकरणीय मंत्रालय ऊर्जा केलिये 19100.00 करोड़, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय केलिये 16628.12 करोड़, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय केलिये 15930.26 करोड़, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता के लिये 14225.47 करोड़, अंतरिक्ष विभाग के लिये 13042.75 करोड़, आदिवासी मामलों का मंत्रालय केलिये 13000.00 करोड़, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के लिये 11469.14 करोड़, भारी उद्योग मंत्रालय के लिये 7242.00 करोड़, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के लिये 7137.68 करोड़, कानून और न्याय मंत्रालय के लिये 6788.33 करोड़, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के लिये 5900.00 करोड़, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के लिये 5453.83 करोड़, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के लिये 4520.00 करोड़, वस्त्र मंत्रालय के लिये 4417.03 करोड़, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के लिये 4342.55 करोड़, आयुष मंत्रालय के लिये 3712.49 करोड़, युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के लिये 3442.32 करोड़, पर्यावरण, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय जलवायु परिवर्तन के लिये 3330.37 करोड़, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के लिये 3290.00 करोड़, संस्कृति मंत्रालय के लिये 3260.93 करोड़, अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय 3183.24 करोड़, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय 3064.80 करोड़, कॉर्पोरेट मामले मंत्रालय 2667.06 करोड़, पर्यटन मंत्रालय 2479.62 करोड़, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय 2379.87 करोड़, बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय 2377.49 करोड़, नागरिक उड्डयन मंत्रालय 2357.14 करोड़, खान मंत्रालय 1941.06 करोड़, राष्ट्रपति, संसद, संघ लोक सेवा आयोग और उपराष्ट्रपति का सचिवालय 1884.92 करोड़, पंचायती राज मंत्रालय 1183.64 करोड़, सहकारिता मंत्रालय  1183.39 करोड़, योजना मंत्रालय 837.26 करोड़, इस्पात मंत्रालय 325.66 करोड़, कोयला मंत्रालय 192.55 करोड़, संसदीय मामलों का मंत्रालय 64.00 करोड़ रुपये की राशि का आवंटन प्रस्तावित है ।

 बजट में योजनागत व्यय प्रस्ताव 

मनरेगा योजना 86000 करोड़, आयुष्मान भारत 7300 करोड़, पीएलआई योजना 6200 करोड़, सौर ऊर्जा (ग्रिड) 10000 करोड़, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली 6250 करोड़, पीएम आवास नगरीय 30171 करोड़,पीएम आवास ग्रामीण 54500 करोड़, पीएम विश्वकर्मा योजना 4824 करोड़, पीएम ग्राम सड़क 19000 और मिशन वात्सल्य योजना के लिये 1472 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं ।
 
 
 लेखक : रमेश शर्मा 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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