कोलकाता, 06 फरवरी । पश्चिम बंगाल में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर एक चरण में मतदान कराने की सिफारिश के पीछे के कारणों को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने स्पष्ट किया है।
सीईओ कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जल्द ही एक चरण में चुनाव कराने की सिफारिश भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को भेजी जाएगी। हालांकि, अंतिम फैसला नई दिल्ली स्थित आयोग के शीर्ष नेतृत्व द्वारा ही लिया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि सिफारिश में इस बात पर जोर दिया जाएगा कि पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए एक चरण में मतदान क्यों आवश्यक है।
सीईओ कार्यालय के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, इस सिफारिश के समर्थन में मुख्य तर्क मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान की गई आलोचना को बनाया जाएगा। उस समय, जब देश कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा था, चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान कराने का निर्णय लिया था।
मुख्यमंत्री ने तब कहा था कि यदि 234 विधानसभा सीटों वाले तमिलनाडु में एक चरण में चुनाव संभव है, तो 294 सीटों वाले पश्चिम बंगाल में आठ चरणों की आवश्यकता क्यों पड़ी?
सूत्रों ने यह भी बताया कि अतीत में पश्चिम बंगाल में एक चरण में चुनाव कराए जाने के उदाहरण मौजूद हैं और इसी आधार पर यह सिफारिश तैयार की जा रही है।
सीईओ कार्यालय के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया, “एक चरण में मतदान का लाभ यह होगा कि राजनीतिक दल एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में अपने समर्थकों को नहीं जुटा पाएंगे। इससे मतदान के दिन या उससे पहले बाहरी तत्वों की मौजूदगी और मतदाताओं को डराने की शिकायतों पर अंकुश लगेगा।”
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि एक चरण में चुनाव कराने की कुछ चुनौतियां हैं। इसके लिए मतदान के दिन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की बड़ी तैनाती की आवश्यकता होगी।
सूत्र ने कहा, “यदि निर्वाचन आयोग इस तरह की व्यवस्था सुनिश्चित कर पाता है, तो वर्ष 2026 में एक चरण में विधानसभा चुनाव कराना पूरी तरह व्यवहारिक है।”
