नई दिल्ली, 07 फ़रवरी। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को कांग्रेस ने किसानों, व्यापारियों और छोटे उद्योगों के लिए नुकसानदेह बताया तो आम आदमी पार्टी (आआपा) ने लोगों के साथ विश्वासघात बताया। दोनों देशों के संयुक्त बयान पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह समझौता भारत की संप्रभुता और आर्थिक हितों को कमजोर करेगा और अमेरिकी किसानों एवं उद्योगों को फायदा पहुंचाएगा।
कांग्रेस ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि यह समझौता भारत के किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को भारी नुकसान पहुंचाएगा। बयान में आरोप लगाया गया कि अमेरिका भारतीय वस्त्र, चमड़ा, रबर, हस्तशिल्प और मशीनरी पर 18 प्रतिशत शुल्क लगाएगा, जबकि भारत अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर शुल्क समाप्त या कम करेगा। केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर का अमेरिकी सामान खरीदने का वादा किया है, जिससे अमेरिका को फायदा होगा और भारत को नुकसान।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर यह केवल एक संयुक्त बयान है, लेकिन इसमें पांच बातें साफ हैं। भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क घटाएगा, रूस से तेल आयात बंद करेगा, अमेरिका से आयात तीन गुना बढ़ेगा, आईटी और सेवाओं पर कोई स्पष्टता नहीं है और भारतीय निर्यात पर अधिक शुल्क लगेगा। यह सौदा अमेरिकी किसानों और उद्योगों के हित में है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी संसद में विपक्ष के सवालों का जवाब देने से बचते रहे। उन्होंने लोकसभा में आने से परहेज़ किया और राज्यसभा में जाकर 97 मिनट का चुनावी भाषण दिया, जिसमें केवल कांग्रेस पर हमला किया गया, लेकिन व्यापार समझौते पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने भारत को तेल आयात पर निगरानी और धमकी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत की संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं । प्रधानमंत्री जनता को गुमराह कर रहे हैं और यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह समझौता भारत के हित में है, जबकि सच्चाई यह है कि यह सौदा केवल अमेरिका के हित में है।
आआपा सांसद संजय सिंह ने कहा कि यह समझौता करोड़ों किसानों के साथ विश्वासघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी किसानों को भारी सब्सिडी मिलती है, ऐसे में भारतीय किसान प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे। मोदी सरकार ने रूस से तेल खरीदना लगभग बंद कर दिया है और अमेरिकी दबाव में यह समझौता किया है। यह सौदा देश को बेचने जैसा है और इसके पीछे बड़े उद्योगपतियों के हित छिपे हैं।
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने इसे नुकसानदेह सौदा बताते हुए आरोप लगाया कि ट्रंप सब कुछ तय कर रहे हैं और मोदी केवल स्क्रिप्ट पढ़ रहे हैं।
आआपा नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि राजनीतिक रूप से कमजोर सरकारों ने भी कभी अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया, लेकिन मोदी सरकार ने देश को अमेरिकी हितों के हवाले कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि भारत और अमेरिका ने आज तड़के अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा को लेकर संयुक्त बयान जारी किया। बयान में कहा गया कि यह पहल दोनों देशों के बीच पारस्परिक, संतुलित और आपसी हितों पर आधारित व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। बयान में इसे भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने वाला तथा व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की ओर एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया गया है। प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 13 फरवरी 2025 को शुरू की गई भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) वार्ता के तहत यह ढांचा एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। भारत अमेरिका के सभी औद्योगिक उत्पादों और कई खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर शुल्क समाप्त या कम करेगा। इनमें पशु आहार के लिए रेड सॉरघम, ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, ड्राई फ्रूट्स, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स सहित कई अन्य उत्पाद शामिल हैं।
