फतेहाबाद, 07 फरवरी। हरियाणा प्रदेश को डिजिटल गवर्नेंस में देश का अग्रणी राज्य बनाने वाले जिला सूचना एवं प्रौद्योगिकी सोसायटी के हजारों कर्मचारी आज स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। सीएम विंडो से लेकर सरल पोर्टल और ई-दिशा केंद्रों तक, सरकार की हर महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने वाले यह कंप्यूटर प्रोफेशनल अब अपनी सेवा सुरक्षा के लिए सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।
अपनी मांगों को लेकर लेकर डीईटीएस कर्मचारियों ने शनिवार को भाजपा जिलाध्यक्ष प्रवीण जोड़ा से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। डीआईटीएस के अंतर्गत कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटरों और कंप्यूटर प्रोफेशनल्स का कहना है कि वह पिछले 15 से 30 वर्षों से निरंतर सेवाएं दे रहे हैं। चाहे कोरोना काल की आपदा हो, चुनाव का कार्य हो या राजस्व रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, इन कर्मचारियों ने सदैव अग्रिम पंक्ति में रहकर कार्य किया है। विडंबना यह है कि करोड़ों रुपये का राजस्व जुटाने वाली इस व्यवस्था के कर्मचारी आज भी कानूनी सुरक्षा से वंचित हैं। कर्मचारियों ने बताया कि सेवा सुरक्षा अधिनियम के आने से एक उम्मीद जगी थी, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर लाभ मिलना अभी भी दूर की कौड़ी बना हुआ है।
23 दिसंबर 2025 को लांच किए गए ऑनलाइन पोर्टल पर डीआईटीएस कर्मचारियों के लिए स्पष्ट वर्गीकरण नहीं है। ओटीपी न आना, वेतन स्लिप जनरेट न होना और पंजीकरण में आ रही दिक्कतों के कारण सैकड़ों कर्मचारी आवेदन करने से वंचित रह रहे हैं। उन्होंने मांग की कि डीआईटीएस कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा अधिनियम, 2024 के दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए। ऑनलाइन पोर्टल पर डीआईटीएस के लिए अलग विभाग/श्रेणी चिन्हित कर तकनीकी त्रुटियों को तुरंत दूर किया जाए।
