बेंगलुरु, 10 फरवरी । लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अनुपस्थिति को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस पार्टी की ओर से जताए गए आक्रोश पर कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने पलटवार किया है। उन्होंने इसे महज़ राजनीतिक दिखावा करार देते हुए कहा कि संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने का काम स्वयं कांग्रेस ने किया है, इसलिए उसे संसदीय परंपराओं पर दूसरों को उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने बयान में विजयेंद्र ने कहा कि संसद की कार्यवाही को बार-बार बाधित करना, प्रधानमंत्री को बोलने का अवसर न देना और टकराव का माहौल बनाना कांग्रेस की पुरानी रणनीति रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब संसद के भीतर अव्यवस्था के लिए कांग्रेस का आचरण जिम्मेदार रहा है, तब वही पार्टी आज लोकतांत्रिक मूल्यों की दुहाई दे रही है।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के उस बयान पर भी विजयेंद्र ने सवाल उठाए, जिसमें इसे भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार की घटना बताया गया था। उन्होंने इसे कांग्रेस के ‘चयनित स्मृतिभ्रंश’ का उदाहरण बताते हुए वर्ष 2004 का संदर्भ दिया। विजयेंद्र ने कहा कि उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का उत्तर नहीं दिया था। उन्होंने पूछा कि क्या उस घटना को भी कायरता या जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कहा जाएगा?
विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि यह विवाद संसदीय परंपराओं से अधिक राजनीतिक अस्तित्व की गणना से जुड़ा है। उनके अनुसार, सिद्धारमैया के बयान किसी सिद्धांत आधारित राजनीतिक तर्क जैसे नहीं लगते, बल्कि हाईकमान को खुश करने और कुर्सी बचाने के उद्देश्य से दिए गए बयान प्रतीत होते हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जब शासन की विफलताएं बढ़ती हैं और जनता का भरोसा कमजोर पड़ता है, तब कांग्रेस पार्टी हंगामा, अवरोध और चयनित नैरेटिव की राजनीति का सहारा लेती है। उन्होंने दावा किया कि जनता कांग्रेस के दोहरे मापदंडों को साफ तौर पर देख रही है। संसद के भीतर अवरोधों को सामान्य बनाना, जिम्मेदारी से बचना और संसदीय मानदंडों की अनदेखी करने वाली पार्टी आज स्वयं को लोकतंत्र का रक्षक बताकर पेश कर रही है, जो पूरी तरह से विरोधाभासी है।
