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पौने दो सौ वर्ष का इतिहास संजोए है सुमेरपुर का ऐतिहासिक तीजा मेला

Date : 15-Sep-2023

 कस्बा सुमेरपुर के 175 वर्ष प्राचीन तीजा मेला में प्रेम एकता, धर्म संस्कृति के प्रति अगाध आस्था तथा बुंदेलखंड की लोक संस्कृति, लोक संगीत, लोक काव्य, लोक नाट्य कला, कुश्ती कला, निर्गुण-सगुण विचार धाराओं का संगम और बुंदेलखंड की उत्कृष्ट शिल्प कला का प्रदर्शन देखने को मिलता है। बुजुर्ग बताते हैं कि श्री कृष्ण जल विहार लीला अर्थात तीजा मेला की शुरुआत पौने दो सौ वर्ष पूर्व पांच झांकियों के साथ हुई थी।

वीरभूमि बुन्देलखण्ड के प्रवेश द्वार जनपद हमीरपुर के सुमेरपुर कस्बे में प्रेम, एकता और सद्भाव का प्रतीक बहु विख्यात ऐतिहासिक तीजा मेले में बुन्देलखण्ड की लोक परम्पराओं पर आधारित लोक संगीत, लोक नाट्य, कुश्ती कला, आल्हा के साथ जीवन मूल्यों से जुड़ी मनमोहक झांकियां शोभायात्रा में चार चांद लगा देती हैं। तीजा मेला कमेटी से जुड़े लोग बताते हैं कि तीजा मेला एक तरह से श्रीकृष्ण लीला महोत्सव है, जो सभी के सहयोग से सम्पन्न होता है।

तीन दिवसीय मेले के पहले दिन चांद थोक में स्थित श्रीकृष्ण मंदिर से तीन दर्जन से अधिक झांकियों की भव्य शोभायात्रा पूरे नगर में निकाली जाती हैं।हरचन्दन तालाब में नाग नाथ लीला व छोटी बाजार में महाराज कंस व अन्य दैत्यों के वध की लीला दिखाई जाती है। पशु बाजार में लगातार तीन दिन नौटकी होती है, दूसरे दिन दंगल लगता है और तीसरे दिन आल्हा गायन होता है, पशु बाजार के पास त्रिवेणी नामक स्थल में 48 घण्टे लगातार कबीरी भजनों का प्रदेश स्तरीय आयोजन चलता रहता है, रामलीला मैदान में नगर पंचायत की ओर से लोकगीत राई नृत्य, और आल्हा गायन का कार्यक्रम होता है,

बताया जाता है बाबू भास्कर निगम द्वारा लिखित पुस्तक अपना सुमेरपुर के अनुसार इस ऐतिहासिक तीजा मेले की शुरुआत सन् 1850 में हुई थी। जब चार-पांच झांकियां सिर्फ एक मुहल्ले में निकाली जाती थी। प्रारम्भ में परसद्दी प्रसाद द्विवेदी, रघुनाथ मिश्रा, जगन्नाथ मिश्रा, मुक्ता प्रसाद, लल्ली सेठ व बाबूराम ओमर इस आयोजन के कर्ता-धर्ता थे। बाबू चाचा ने इस परम्परा को न सिर्फ आगे बढ़ाया बल्कि उसका परिवर्धन भी किया। कला प्रेमी बाबू चाचा के प्रयास से झांकियों की संख्या और बढ़ाई गई। रथों की सवारी के साथ जलविहार कार्यक्रम को और प्रभावी बनाया गया। शोभायात्रा में रथों की भूमिका बढ़ाई गई तो जलविहार में प्रमुख पात्रों की सहभागिता भी बढ़ गई।

बाबू चाचा के निधन के बाद रामेश्वर गुप्त ने शोभायात्रा के आयोजन की बागडोर सम्भाली। इनके समय में तीजा कमेटी का विधिवत गठन भी हुआ जिसमें प्रथम कार्यकारिणी के अध्यक्ष रामेश्वर गुप्त , प्रबंधक भिखारी प्रसाद मिश्रा, रमाकांत शुक्ल, सूरा पण्डा, मुंशी राजाराम, तथा गया प्रसाद मिश्र सहयोगी थे। इसके बाद नवीन कार्यकारिणी के अध्यक्ष रामकुमार बने । इनके कार्यकाल में समिति को और अच्छी सफलता मिली। जब प्रतिवर्ष नई-नई झांकियां देकर समारोह के इतिहास में नया अध्याय जुड़ता चला गया।

इसके बाद कमेटी का अध्यक्ष टुन्नी भैया को बनाया गया, प्रबंधक बृजलाल सिंह, सचिव नवल किशोर मिश्र, चन्द्रशेखर पाण्डेय, कुंज बिहारी पाण्डेय, रामशरण मिश्र, सहित तमाम उत्साही कार्यकर्ता सहयोग करते चले आ रहे है। उनके निधन के बाद सिंहल दुबे औपचारिक रुप से इसके अध्यक्ष रहे वर्तमान में बब्बू दीक्षित को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। 18 से 20 सितंबर तक आयोजित होने वाले मेले की तैयारियां जोरों पर हैं। पूर्व की भांति पशु बाजार में मेला लगेगा, तीजा मेला कमेटी की ओर से छोटी बाजार में भी मेले की शुरुआत करने की तैयारी चल रही है।


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