मेदिनीपुर, 03 फ़रवरी । केंद्रीय बजट में काजू, कोको और नारियल के उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देने की घोषणा के बाद पूर्व मेदिनीपुर जिले के कांथी क्षेत्र में काजू उद्योग से जुड़े व्यापारियों और उद्यमियों में उत्साह का माहौल है। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2030 तक इन कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने का लक्ष्य तय किए जाने से स्थानीय उद्योग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
एक समय कांथी और दीघा के तटीय इलाकों में बड़े पैमाने पर काजू की खेती होती थी, लेकिन वर्तमान में कांथी और रामनगर क्षेत्र में संचालित एक हजार से अधिक छोटी-बड़ी काजू प्रसंस्करण इकाइयों को कच्चे माल के लिए मुख्य रूप से विदेशों से आयात पर निर्भर रहना पड़ रहा है, क्योंकि स्थानीय बागानों में लगातार कमी आई है।
उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें जिले में काजू की खेती को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस पहल करती हैं तो उत्पादन लागत में कमी आएगी और स्थानीय किसानों को भी लाभ होगा।
कोंटाई काजू एसोसिएशन के अध्यक्ष मिर्जा रुकुनुद्दीन ने बताया कि पश्चिम बंगाल में कच्चे काजू की उपलब्धता सीमित है और अन्य राज्यों से आने वाला माल वर्ष के कुछ ही महीनों की जरूरत पूरी कर पाता है, जबकि शेष समय आयात पर निर्भरता बनी रहती है। वहीं संगठन के चेयरमैन शेख अब्दुस सत्तार ने काजू उद्योग पर कर भार कम करने की मांग उठाई है।
बंगाल काजू एसोसिएशन के अध्यक्ष और अखिल भारतीय काजू एसोसिएशन के संयुक्त सचिव शेख अनवरुद्दीन ने बजट प्रावधानों का स्वागत करते हुए कहा कि पहली बार बजट में काजू उद्योग का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिससे घाटे की भरपाई और निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हजारों लोगों को लाभ पहुंचेगा।
बजट में कृषि निर्यात पर दिए गए जोर से यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि यदि कांथी के प्रसंस्कृत काजू का सीधा निर्यात बढ़ने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
