धर्मशाला, 06 फ़रवरी। हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसके लिए लोकतंत्र, संविधान और जनहित कोई मायने नहीं रखते। निर्वाचित विधायकों की विधायक क्षेत्र विकास निधि और ऐच्छिक निधि को जानबूझकर रोककर सरकार न केवल जनप्रतिनिधियों का अपमान कर रही है, बल्कि प्रदेश की जनता के विकास अधिकारों पर सीधा प्रहार कर रही है। यह कदम प्रशासनिक मजबूरी नहीं, बल्कि राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित तानाशाही सोच का परिणाम है। यह आरोप भाजपा विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने यहां जारी एक प्रेस बयान में लगाये।
उन्होंने कहा कि विधायक निधि कोई सरकार की कृपा नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत जनहित के कार्यों के लिए दिया गया अधिकार है। इस निधि के माध्यम से सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, सामुदायिक भवन और आपदा राहत जैसे छोटे लेकिन अत्यंत आवश्यक विकास कार्य पूरे किए जाते हैं। कांग्रेस सरकार इस निधि को रोककर सीधे-सीधे जनता को दंडित कर रही है।
उन्होंने कहा कि जो सरकार दिन-रात आर्थिक संकट का रोना रोती है, वही सरकार सत्ता में आते ही हजारों करोड़ रुपये की फिजूलखर्ची कर चुकी है। मित्रों को चेयरमैन पद, कैबिनेट रैंक, सरकारी वाहन, बंगले और अन्य सुविधाएं बांटी गईं, लेकिन जब बात जनता के चुने हुए विधायकों की आती है तो खजाना खाली होने का बहाना बनाया जाता है। यह दोहरा चरित्र कांग्रेस सरकार की असलियत उजागर करता है।
आरडीजी ग्रांट पर कांग्रेस फैला रही भ्रम
विपिन सिंह परमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए अब आरडीजी ग्रांट को लेकर भी जनता को गुमराह कर रही है। सच्चाई यह है कि यह ग्रांट किसी एक राज्य के साथ भेदभाव के कारण नहीं, बल्कि वित्त आयोग के निर्णय के तहत बंद की गई है और यह केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं है। देश के कुल 17 राज्यों को यह ग्रांट अब नहीं मिल रही है।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस अन्याय को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी। यदि कांग्रेस सरकार ने तुरंत विधायक निधि बहाल नहीं की और जनता के विकास से खिलवाड़ बंद नहीं किया, तो भाजपा सड़क से लेकर सदन तक निर्णायक संघर्ष करेगी।
