जम्मू, 06 फ़रवरी। जम्मू और कश्मीर सरकार ने अनंतनाग में प्रस्तावित 249 बिस्तरों वाले प्रसूति एवं शिशु देखभाल अस्पताल (एमसीसीएच) की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) वापस कर दी है और संबंधित विभाग को नाबार्ड के अलावा वित्तपोषण का एक स्पष्ट स्रोत खोजने की सलाह दी है।
सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा को यह जानकारी दी। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा तैयार की गई 86.5 करोड़ रुपये की इस परियोजना की डीपीआर को वित्त विभाग को नाबार्ड ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष के तहत प्रशासनिक मंजूरी के लिए वित्तीय सहमति हेतु प्रस्तुत किया गया था। हालांकि प्रस्ताव को विशिष्ट टिप्पणियों के साथ वापस भेज दिया गया।
सरकार ने अनंतनाग पूर्व के विधायक रियाज अहमद खान द्वारा उठाए गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, "वित्त विभाग ने नाबार्ड के अलावा परियोजना के लिए वित्तपोषण के एक स्पष्ट स्रोत की पहचान करने और डीपीआर में फर्नीचर और साज-सज्जा की वस्तुओं को शामिल करने की सलाह दी है।"
सरकार ने कहा कि संबंधित पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा संशोधित वित्तीय अनुमानों पर वर्तमान में काम किया जा रहा है।
सरकार ने सदन को सूचित किया कि 2025-26 के पूंजीगत व्यय बजट के तहत इस परियोजना के लिए 5 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सरकार ने इस अस्पताल को 2026-27 में पूंजी निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई) योजना के तहत प्रस्तावित करने की भी योजना बनाई है ताकि इस "बड़े बजट वाली परियोजना" के क्रियान्वयन में तेजी लाई जा सके। इससे पहले भीड़भाड़ वाले शेरबाग क्षेत्र से मौजूदा एमसीसीएच के स्थानांतरण से संबंधित एक अलग प्रश्न के उत्तर में सरकार ने कहा कि मिर्जा अफजल बेग मेमोरियल अस्पताल (एमएएमबी) सरकारी मेडिकल कॉलेज जीएमसी जांगलातमंडी, अनंतनाग के ब्लॉक-ए के पीछे भूमि की पहचान पहले ही कर ली गई है। उत्तर में कहा गया, "अस्पताल का बाल रोग विभाग फिलहाल एमएएमबी जीएमसी के ब्लॉक-ए में स्थानांतरित कर दिया गया है जबकि स्त्री रोग और प्रसूति सेवाएं शेरबाग से ही संचालित होती रहेंगी।" निर्माण पूरा होने के बाद दोनों विभागों को नए एमसीसीएच भवन में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, यह भी बताया गया।
शेरबाग स्थित एमसीसीएच में जगह की भारी कमी और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण यह बार-बार सार्वजनिक ध्यान का केंद्र रहा है। पीडब्ल्यूडी और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं ने 2014 में ही अस्पताल के भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया था लेकिन यह अभी भी उपयोग में है।पहले अस्पताल को केपी रोड स्थित रहमत-ए-आलम अस्पताल में स्थानांतरित करने की योजना आईआईटी जम्मू और एनआईटी श्रीनगर द्वारा इमारत को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद साकार नहीं हो सकी।
विशेषज्ञ संस्थानों ने इमारत के केवल भूतल और प्रथम तल के जीर्णोद्धार की सिफारिश की थी जिसका निर्माण मूल रूप से 2000 में एक ट्रस्ट द्वारा किया गया था। बाद में आवास एवं शहरी विकास विभाग, जम्मू-कश्मीर पुलिस परिषद और सार्वजनिक विकास विभाग ने 13 करोड़ रुपये की लागत से द्वितीय, तृतीय तल और छत का निर्माण किया लेकिन फिर भी इमारत अस्पताल के संचालन के लिए अनुपयुक्त पाई गई। रहमत-ए-आलम अस्पताल के पास लगभग 30 कनाल भूमि है।
