श्योपुर , 06 फ़रवरी । मध्य प्रदेश के श्योपुर जिला मुख्यालय के समीप स्थित राजस्थान के सवाई माधोपुर की रणथम्भौर सेंचुरी में बढ़ते बाघ अब अपनी नई टेरिटरी की तलाश में है। यही वजह है कि विगत दो माह के भीतर दूसरी बार कूनो के जंगल में टाइगर (बाघ) की गतिविधियां देखी गई है। इससे पहले भी कई बार रणथम्भौर के बाघो को कूनो के जंगलों में अपना आशियाना तलाशते देखा गया है।
प्रबंधन से जुड़ी खबरों के अनुसार कूनो राष्ट्रीय उद्यान के टीकटोली रेंज में एक टाइगर (बाघ) नजर आया है, जिसे फ्लायिंग केट सफारी द्वारा कैमरे में कैद कर लिया गया। यह टाइगर रणथम्भौर सेंचुरी से कूनो पहुंचा है। जिसे जंगल क्षेत्र में भ्रमण करते हुए देखा गया है।
मिली जानकारी के अनुसार यह टाइगर टीकटोली क्षेत्र के जंगल में गुरूवार की दोपहर देखा गया। जिसे सफारी के स्टॉफ द्वारा कैमरे में कैद करते हुए इसकी वीडियो क्लिप को सोशल मीडिया पर वायरल किया गया है। हालांकि प्रबंधन के अफसर इस बात की पुष्टि नहीं कर रहे हैं, लेकिन दावा किया जा रहा है कि यह बाघ रणथम्भौर के जंगल से कूनो पहुंचा है।
चीतो के लिये खतरा साबित हो सकता है टाइगर!
कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चल रहे चीता प्रोजेक्ट के लिये टाइगर की एंट्री चिंताओं भरी हो सकती है। ऐसा इसलिये कि यदि चीता और बाघ का सामना होता है, तो यह चीतों के लिये खतरे का कारण बन सकता है। खबर है कि कूनो प्रबंधन ने टाइगर के मूवमेंट के चलते निगरानी बढा दी है।
रणथम्भौर के टाइगरों को रास आता रहा है ‘कूनो‘
यह कोई पहला मौका नहीं है, जब रणथम्भौर से कोई बाघ मध्यप्रदेश के जंगलों तक पहुंचा हो। इससे पहले भी कई बाघ-बाघिन यहां तक जा चुके हैं। विगत दो माह पहले रणथम्भौर की टाइगर सुल्ताना का बेटा टी-2512 सीमा लांघकर मध्यप्रदेश के कूनो पहुंचा था। इससे पहले भी कूनों में टाइगर का आवगमन होता रहा है। रणथम्भौर का बाघ टी-38 लंबे समय तक कूनो में रहने के बाद वर्ष 2020-21 में रणथम्भौर लौटा था। रणथम्भौर से कूनो आने वाले बाद्यो में टी-38 (बाघिन टी-13 की संतान), टी-72, टी-47 (मोहन), टी-132 और टी-136 शामिल हैं।
इसलिये सहजता से आ जाते हैं बाघ
वन विभाग से जुडी जानकारी के अनुसार राजस्थान के रणथम्भौर से मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान तक नेचुरल टाइगर कॉरिडोर है। रणथम्भौर से निकलकर चंबल के किनारे-किनारे होते हुए बीहड़ों के सहारे अधिकतर बाघ-बाघिन कूनो तक पहुंच जाते हैं। रणथम्भौर से कूनों की दूरी करीब 100 किमी है।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान के डीएफओ, आर थिरूकुराल का कहना है कि सूचना तो मिली है, चूंकि मैने अभी वीडियो देखा है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता कि यह वीडियो कूनो का है, क्योंकि रणथम्भौर का जंगल भी कूनो जैसा ही है। हम पता करवा रहे हैं।
