गुवाहाटी, 10 फरवरी। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने आज चराईदेव में राजबारी (शाही दरबार) की ज़मीन पर अतिक्रमण और मदरसे के निर्माण के आरोपों के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया। चराईदेव अहोम साम्राज्य की पहली राजधानी और ऐतिहासिक महत्व का प्रमुख स्थान है।
शिवसागर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सरमा ने अहोम समुदाय के सदस्यों की चिंताओं का जवाब दिया, जिन्होंने आरोप लगाया था कि राजबारी, जो अहोम शासन के दौरान शाही दरबार और प्रशासनिक केंद्र के तौर पर काम करती थी, पर अतिक्रमण किया गया था। उन्होंने दावा किया कि आपत्तियों के बावजूद ज़मीन पर एक मदरसा और एक मस्जिद बनाई गई थी।
जनसभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि ज़मीन ऐतिहासिक रूप से राजबारी के रूप में पहचानी जाती है और इसे साफ़ किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि इसमें शामिल लोगों को साइट की ऐतिहासिक स्थिति के बारे में बताया जाए और निर्माण को हटाने की ज़रूरत है। डॉ. सरमा ने कहा कि संदेश देते समय उनका नाम लिया जा सकता है और चेतावनी दी कि अगर ज़रूरत पड़ी तो सरकार ज़मीन अधिग्रहण के साथ आगे बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री के हवाले से कहा गया, “राजबारी में मदरसा नहीं चल सकता।” उन्होंने असम की ऐतिहासिक विरासत की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
ऊपरी असम स्थित चराईदेव को अहोम वंश का आध्यात्मिक और राजनीतिक केंद्र माना जाता है, जिसने लगभग 600 सालों तक असम पर शासन किया।
