पौड़ी गढ़वाल, 13 फ़रवरी। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने मानव-वन्यजीव संघर्ष के बढ़ते मामलों पर गहरा आक्रोश जताया है। शुक्रवार को दल के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी पौड़ी को ज्ञापन सौंपकर जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों पर रोक लगाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
यूकेडी नेताओं ने कहा कि लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीण दहशत में जीने को मजबूर हैं। जंगली जानवरों के आतंक के कारण लोग गांव छोड़ने को विवश हो रहे हैं, जिससे कई गांव खाली होते जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बाघ के अलावा गुलदार जैसे अन्य खतरनाक वन्यजीवों को अन्य स्थानों से लाकर छोड़ा गया है, जिससे वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल नहीं हैं और हिंसक व्यवहार करते हुए आसान शिकार की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
दल ने मांग की कि वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत गुलदार व भालू की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करते हुए उन्हें नेशनल पार्क में स्थानांतरित किया जाए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक सोलर लाइट लगाने, झाड़ियों की कटाई के लिए वन सरपंचों को अनुदान देने, आधुनिक घास कटाई मशीन उपलब्ध कराने तथा ग्रामीणों को निःशुल्क सर्च लाइट देने की मांग भी उठाई।
यूकेडी ने प्रदेश की राजधानी में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो दल उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
ज्ञापन सौंपने वालों में महिला प्रकोष्ठ की केंद्रीय अध्यक्ष संतोष भंडारी,केंद्रीय प्रवक्ता क्रांति प्रसाद भट्ट,केंद्रीय उपाध्यक्ष आशुतोष नेगी,केंद्रीय महामंत्री देवचंद उत्तराखंडी,जिलाध्यक्ष अर्जुन नेगी,जिला उपाध्यक्ष जेपी नैनवाल,जिला महासचिव पंकज पोखरियाल, ब्लॉक अध्यक्ष गौरव चंदोला,नगराध्यक्ष अजय चंदोला सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
