मुंबई ,13 फरवरी ।आज की आदमी जीवन शैली ने मानसिक तनाव को बहुत ज़्यादा बढ़ा दिया है और दिमागी तनाव की वजह से दुनिया भर में हर साल लगभग एक ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हो रहा है। भागदौड़ और प्रतियोगिता के ज़माने में बढ़ता मेंटल स्ट्रेस एक ग्लोबल प्रॉब्लम बन गया है। भारत में भी सुसाइड के मामलों में खतरनाक बढ़ोतरी हुई है और मेंटल हेल्थ एक बहुत ही गंभीर मुद्दा बन गया है। इस्कॉन के स्पिरिचुअल आध्यात्मिक गुरु और गोवर्धन इकोविलेज के डायरेक्टर गौरांग दास ने आज बताया कि'तनाव से राहत और खुशहाल ज़िंदगी के लिए गुरु की' ज़रूरी टॉपिक पर मशविरा देते हुए कहा कि सामान्य स्वास्थ के साथ-साथ मे मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आध्यात्मिक और शाश्वत जीवन शैली ल अपनाना समय की ज़रूरत है।
ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और इस्कॉन ठाणे की तरफ से ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए गुरुवार 12 फरवरी को डॉ. काशीनाथ घनेकर थिएटर में एक खास लेक्चर का आयोजन किया गया। इस प्रोग्राम में ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की नई चुनी गई मेयर शर्मिला पिंपोलकर, डिप्टी मेयर कृष्णा पाटिल, म्युनिसिपल कमिश्नर सौरभ राव, अतिरिक्त आयुक्त प्रशांत रोडे, उपायुक्त जी.जी. गोडेपुरे,और उपायुक्त उमेश बिरारी आदि उपस्थित थे।
आज हर इंसान स्ट्रेस से गुज़र रहा है, चाहे वह स्टूडेंट हो, हाउसवाइफ हो या वर्किंग क्लास, हर किसी को कोई न कोई चिंता है। इससे बाहर निकलने का रास्ता खोजना ज़रूरी है। मेयर शर्मिला पिंपोलकर ने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा आयोजित इस प्रोग्राम की तारीफ़ करते हुए कहा कि सही मायने में खुशहाल ज़िंदगी जीने के लिए बैलेंस, संतोष और पॉजिटिविटी की ज़रूरत होती है।
इस मौके पर भगवद गीता की शिक्षाओं का ज़िक्र करते हुए कहा दास ने बताया कि स्ट्रेस की असली वजह उम्मीदों और असलियत के बीच का अंतर है। गौरांग दास ने आगे कहा, “हम सब पावर, पैसा और इज्जत पाने की कोशिश करते हैं; लेकिन रिज़ल्ट हमारे हाथ में नहीं होता। हमारे हाथ में सिर्फ कोशिशें होती हैं, रिज़ल्ट पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं होता, यह अवेयरनेस स्ट्रेस से राहत पाने का पहला कदम है।”
ज़िंदगी में स्ट्रेस, कॉम्पिटिशन, प्रमोशन, कामयाबी और नाकामी बढ़ती है, उम्मीदें पूरी न होने पर दिमाग पर स्ट्रेस बढ़ता है और इसका असर मेंटल हेल्थ पर पड़ता है, उन्होंने भगवद गीता से गाइड होकर पॉजिटिव सोच बनाए रखने की अपील की। कहा गया कि सम्मान, सेवा और सामूहिक शक्ति को स्वीकार करना, स्ट्रेस-फ्री ज़िंदगी के ज़रूरी हिस्से हैं। उन्हें गाइड किया गया, “अगर हम यह ध्यान में रखते हुए विनम्रता और सेवा का रवैया अपनाते हैं कि काम पर हमसे बड़ी कोई शक्ति है, तो मन शांत रहता है।”
‘चिंता करना बंद करो और जीना शुरू करो’ का मंत्र दिया गया। गौरांग दास ने बताया कि भले ही बाहरी हालात पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं है, लेकिन हम अपनी चेतना और विचारों पर कंट्रोल पा सकते हैं।
