नई दिल्ली, 17 फरवरी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने मंगलवार को कहा कि भारत की विशाल एवं विविध जनसंख्या ग्रामीण-शहरी विभाजन और संक्रामक एवं गैर-संक्रामक बीमारियों का दोहरा बोझ देश के सामने बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बेहद जरूरी है और भारत ने अपने राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का व्यापक एकीकरण किया है।
अनुप्रिया पटेल ने यहां भारत मंडपम में 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' से पहले आयोजित विशेष सत्र में कहा कि एआई को केवल तकनीक अपनाने के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे देश की विशिष्ट चुनौतियों का रणनीतिक समाधान माना जा रहा है। आज स्वास्थ्य क्षेत्र की पूरी शृंखला में एआई का इस्तेमाल हो रहा है। बीमारी की निगरानी से लेकर रोकथाम, जांच और इलाज तक एआई बहुत ज्यादा कारगर है। एआई स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में एआई का इस्तेमाल कई स्तरों पर हो रहा है। बीमारी की शुरुआती पहचान, समय पर रोकथाम, सटीक जांच और बेहतर इलाज के लिए एआई आधारित उपकरण काम कर रहे हैं। एआई से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ रही है और यह ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के बीच की खाई को कम करने में भी मदद करेगा।
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि एआई आधारित रोग निगरानी प्रणाली से बीमारियों का फैलाव पहले ही पकड़ में आ जाता है। इसी तरह एआई से जांच और निदान तेज और सटीक हो रहा है। इलाज के दौरान एआई डॉक्टरों को बेहतर निर्णय लेने में मदद कर रहा है। भारत की स्वास्थ्य चुनौतियों को देखते हुए एआई का इस्तेमाल केवल विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में स्वास्थ्य क्षेत्र की मजबूती बेहद जरूरी है और एआई इसमें अहम भूमिका निभा रहा है।
