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मप्र के उज्जैन में दोपहर में हुई बाबा महाकाल की भस्म आरती, सिर पर 'पुष्प सेहरा' सजाकर हुआ विशेष श्रृंगार

Date : 16-Feb-2026

  महाशिवरात्रि के दूसरे दिन साल में केवल एक बार दोपहर में होती है बाबा महाकाल की भस्म आरतीउज्जैन, 16 फरवरी। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर में महाशिवरात्रि पर्व पर मंदिर में चार प्रहर के पूजन-अभिषेक और विशेष अनुष्ठानों के बाद सोमवार को भगवान महाकाल को सेहरा अर्पित किया गया। इस दौरान साल में एक बार दोपहर में होने वाली विशेष भस्म आरती भी हुई।

दरअसल, महाशिवरात्रि पर भगवान महाकाल लगातार 44 घंटे भक्तों को दर्शन देते हुए हैं। इसीलिए साल में एक बार महाशिवरात्रि के दूसरे दिन बाबा महाकाल की भस्म आरती दोपहर में होती है। इस बार भी महाशिवरात्रि पर शनिवार-रविवार की दरमियानी रात 2.30 बजे मंदिर के पट खुले और भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल के दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ, जो कि सोमवार को दोपहर 12 बजे तक चला। इसके बाद बाबा महाकाल की भस्म आरती हुई।

महाशिवरात्रि के दूसरे दिन बाबा महाकाल का दूल्हे के रूप में भव्य श्रृंगार किया गया। सुबह 11 ब्राह्मणों ने रुद्राभिषेक और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का अभिषेक किया। इसके बाद पांच प्रकार के फलों के रस और पंचामृत से भी अभिषेक हुआ। भगवान महाकाल को चावल, खड़ा मूंग, तिल, गेहूं, जौ, साल और खड़ा उड़द जैसे सप्तधान्य अर्पित किए गए। सप्तधान्य चढ़ाने के बाद पुष्पों से बने मुकुट से आरती हुई। मंदिर के पुजारियों ने भगवान श्री महाकालेश्वर का श्रृंगार कर पुष्पों का सेहरा बांधा और विभिन्न मिठाइयों, फलों और पंचमेवा का भोग लगाया गया।

इसके बाद दोपहर 12 बजे भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन किया गया। मंत्रोच्चार के साथ जल अर्पित करने के बाद कपूर आरती हुई। इसके बाद भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित कर दिव्य श्रृंगार किया गया। श्रृंगार पूरा होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर भस्म अर्पित की गई। भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल को रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष माला तथा मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित कर भव्य श्रृंगार किया गया। साल में केवल एक बार दिन में होने वाली भस्म आरती दोपहर 12 बजे शुरू होकर दोपहर 2 बजे तक चली। भस्म आरती के बाद भोग आरती का आयोजन हुआ। अब शाम को पूजन और शयन आरती के पश्चात महाकाल मंदिर के पट बंद हो जाएंगे।


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