सांस्कृतिक विविधताओं की भूमि केरल | The Voice TV

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सांस्कृतिक विविधताओं की भूमि केरल

Date : 22-May-2023

सांस्कृतिक विविधताओं की भूमि केरल एक समग्र सांस्कृतिक समाहार है जिसमें विभिन्न धर्मों, समुदायों, क्षेत्रीय संस्कृतियों और भाषाई विविधताओं का समावेश हैकेरल की संस्कृति की तुलना विभिन्न रंगों के मनकों और धागों वाली माला से की जा सकती है जिसके मनके मलयालम भाषा के जरिए गुंथे हैंकेरल की सांस्कृतिक विविधता का निर्माण अरब सागर और पश्चिमी घाटों के बीच इसकी भौगोलिक अवस्थिति के कारण हुआ हैभरपूर वर्षावन से परिपूर्ण इसकी विशिष्ट भौगोलिक अवस्थिति, विदेशों के साथ इसके प्राचीन व्यापारिक संबंध, विभिन्न कालों के दौरान प्रवासी समुदायों के राज्य में आगमन, कृषि की परंपरा, पाककला और इसकी कला, साहित्य और विज्ञान की परंपराओं से केरल का निर्माण हुआ है

यद्यपि केरल प्राचीन काल से ही एक विशिष्ट सांस्कृतिक क्षेत्र के रूप में रहा है, इसका राजनैतिक एकीकरण केरल राज्य का गठन होने के बाद हुआब्रिटिश शासन के तहत त्रावणकोर और कोच्ची राज्यों, और मद्रास प्रेसिडेंसी के मलबार जिला के बीच विभाजित यह भूमि 1 नवंबर 1956 को एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आयाकेरल के पूरब और दक्षिण में तमिलनाडु; उत्तर और उत्तर-पूर्व में कर्नाटक; और पश्चिम में अरब सागर हैअरब सागर में स्थित केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप और पुदुच्चेरी राज्य का हिस्सा मय्यषि भाषाई और सांस्कृतिक रूप में केरल की संस्कृति के अंग हैं

केरल की सांस्कृतिक विरासत शताब्दियों पुरानी हैकेरल की संस्कृति देशी कला रूपों, भाषा, साहित्य, स्थापत्य शैली, संगीत, त्योहारों, पाककला, पुरातात्विक स्मारकों, विरासत केंद्रों आदि का मिश्रित रूप हैइन सबको सहेज कर सुरक्षित रखने के लिए अनेक सांस्कृतिक संस्थाएं हैं

केरल के कला परिदृश्य में प्राचीन शास्त्रीय कला, लोक कला के साथ-साथ सिनेमा जैसे आधुनिक कला स्वरूप सम्मिलित हैंकेरल की कलाओं को आमतौर पर ऑडियो - विजुअल (श्रव्य - दृश्य) , और शास्त्रीय एवं लोक कलाओं के रूप में विभाजित किया जा सकता हैदृश्य कलाओं में शामिल हैं मंचीय कला, मूर्तिकला, चित्रकला और सिनेमा जिसमें शास्त्रीय और लोक कला दोनों शामिल हैंसंगीत और वाद्य श्रव्य कला के रूप हैंकेरल की सांगीतिक संस्कृति में शामिल हैं लोक संगीत (लोक गीत, आनुष्ठानिक गान, तिरुवातिरा गान, वंचिपाट्टु) और शास्त्रीय संगीत जिसमें आते हैं कर्नाटक संगीत, कथकली संगीत और सोपान संगीतकेरल के पारंपरिक वाद्ययंत्रों में शामिल प्रमुख ऑर्केस्ट्रा हैं- पंचवाद्यम, चेंडामेलम और तायम्बका

केरल की विशिष्ट स्थापत्य परंपरा हैउपासना स्थल और प्राचीन भवन इस स्थापत्य शैली के उदाहरण हैं जो सरलता पर बल देती हैउनका निर्माणतचुशास्त्रके अनुसार किया गया थाआप यहां विशिष्ट मंदिर स्थापत्य शैली भी देख सकते हैंतंत्र समुच्चयम, शिल्पचंद्रिका और मनुष्यालय चंद्रिका स्थापत्य विज्ञान के ऊपर रचित केरल के कुछ प्रमुख ग्रंथ हैं

मलयालम सिनेमा का क्षेत्र भारतीय सिनेमा के सबसे मजबूत स्तंभों में शुमार हैकेरल ने देश को अनेक विश्वविख्यात फिल्मी हस्तियां दी हैंकेरल में पहली सिनेमा कोष़िक्कोड में 1906 में दिखाई गई थीबीसवीं सदी के तीसरे दशक तक मोबाइल सिनेमा स्क्रीनिंग ने स्थायी सिनेमा हॉलों के विकास का मार्ग प्रशस्त किया

शुरुआती दिनों में प्रायः तमिल फिल्में दिखाई जाती थींपहली मलयालम फिल्म थी मलयालम सिनेमा के प्रणेता माने जाने वाले जे. सी. डैनियल की बिना आवाज का चलचित्र (साइलेंट फिल्म) विगता कुमारन। 1933 में, दूसरी फिल्म आई मार्तंड वर्मामलयालम की पहली बोलती फिल्म थी बालन (1938)। पहली सिनेमा स्टूडियो उदय की स्थापना आलप्पुष़ा में 1948 में हुई थी

केरल के लोगों का मुख्य भोजन चावल हैकेरल की पाककला में अमूमन भात की प्रधानता होती है जिसके साथ सब्जियां, मछली, मांस और अंडे की करी खाए जाते हैंचावल की मदद से अन्य अनेक किस्म के व्यंजन तैयार किए जाते हैंकेरल के स्थानीय व्यंजनों के अलावा आज केरल के पास बहुसांस्कृतिक पाककला हैचावल और नारियल केरल के भोजन के मुख्य आधार हैं

केरल के जीवन की संपूर्ण छटा यहां के त्योहारों के अवसर पर दिखाई पड़ते हैंये त्योहार धार्मिकता और उपासना स्थलों से जुड़े होते हैं और साथ ही उनमें से कुछ धर्मनिरपेक्ष भी होते हैंओणम केरल का राजकीय त्योहार हैइस राज्य की अपनी देशी खेल संस्कृति और लोक क्रीड़ाएं हैंकलरिप्पयट्ट् केरल में विकसित मार्शल आर्ट हैविविध सांस्कृतिक विरासत और श्रेष्ठ सामाजिक निरूपक या संकेतक केरल की खास विशेषताएं हैंदेश में सबसे अधिक साक्षरता, लैंगिक समता और न्यूनतम मातृ-शिशु मृत्यु दर वाला यह राज्य सबसे लिए स्वास्थ्य, शिक्षा के मानकों, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सामाजिक न्याय, कानून व्यवस्था तथा प्रेस एवं अन्य मीडिया के प्रभाव के मामले में भी यह अव्वल हैविकास के अत्यंत सराहनीय केरल मॉडल के पास ये विशिष्ट खूबियां अधारभूत रूप में हैं


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