समाज सुधारक और जन नेता - बाल गंगाधर तिलक | The Voice TV

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समाज सुधारक और जन नेता - बाल गंगाधर तिलक

Date : 01-Aug-2024

बाल गंगाधर तिलक एक महान राष्ट्रवादी, समाज सुधारक और जन नेता थे जिन्होंने अपने विचारों और आदर्शों से कई पीढ़ियों को प्रभावित किया। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का जन्म 13 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था। तिलक के पिता का नाम गंगाधर रामचंद्र तिलक था। वह संस्कृत के विद्वान और प्रख्यात शिक्षक थे। वहीं उनकी माता का नाम पार्वती बाई गंगाधर था। तिलक का विवाह तपिबाई नाम की कन्या से 1871 में हुआ था, जिनका नाम शादी के बाद सत्यभामा हो गया। तिलक जी ने एक नारा दिया था –“स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मै इसे लेकर रहूँगा|

शिक्षा

बाल गंगाधर तिलक पढ़ाई में शुरू से ही काफी तेज थे. उन्होंने प्राथमिक शिक्षा रत्नागिरी के विद्यालय में पूरी की. इसके बाद पिता का रत्नागिरि से पुणे स्थानांतरण हुआ तो उनका दाखिला भी पुणे के एंग्लो वर्नाकुलर स्कूल में करा दिया गया. 1877 में तिलक ने पुणे के डेक्कन कॉलेज से संस्कृत और गणित विषय की डिग्री हासिल की. उसके बाद मुंबई के सरकारी लॉ कॉलेज से एलएलबी पास किया पढ़ाई पूरी करने के बाद तिलक पुणे के एक निजी स्कूल में गणित और अंग्रेजी की शिक्षक बन गए | हालांकि स्कूल के अन्य शिक्षकों से मतभेद के बाद 1880 में उन्होंने पढ़ाना छोड़ दिया. तिलक अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली के आलोचक थे. स्कूलों में ब्रिटिश विद्यार्थियों की तुलना में भारतीय विद्यार्थियों के साथ हो रहे दोगले व्यवहार का वे विरोध करते थे |

मालाबारी प्रस्ताव

1891 ई० में बाल विवाह को प्रतिबन्धित करने वाला एक प्रस्ताव लाया गया, जिसे 'मालाबारी प्रस्ताव' कहा जाता है। इसके परिणामस्वरूप एक अधिनियम पारित हुआ, जिसे 'आयु सम्मति अधिनियम' (Age of Consent Act) कहा गया, जिसमें 12 वर्ष से कम आयु की कन्याओं के विवाह पर रोक लगा दी गयी। इस अधिनियम का बाल गंगाधर तिलक ने विरोध किया था।

गणोत्सव और समाज सेवा

तिलक जी  ने बंबई में अकाल और पुणे में प्लेग की बीमारी के दौरान देश में कई सामाजिक कार्य किए. 1893 में उन्होंने महाराष्ट्र में सार्वजनिक तौर पर गणेशोत्सव मनाने की शुरुआत की. इसमें गणेश चतुर्थी के दिन लोग नई गणेश मूर्ति घर में 10 दिन तक रखकर उत्सव मनाते थे. तिलक  के दिमाग में विचार आया कि क्यों गणेशोत्सव को घरों से निकाल कर सार्वजनिक स्थल पर मनाया जाए, ताकि इसमें हर जाति के लोग शिरकत कर सकें. तिलक के इस प्रयास में पेश्वाओं की भी सहयोग मिला |

लोकमान्य तिलक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए लेकिन जल्द ही वे कांग्रेस के नरमपंथी रवैये के विरुद्ध बोलने लगे। 1907 में कांग्रेस गरम दल और नरम दल में विभाजित हो गयी। गरम दल में लोकमान्य तिलक के साथ लाला लाजपत राय और श्री बिपिन चन्द्र पाल शामिल थे। इन तीनों को लाल-बाल-पाल के नाम से जाना जाने लगा। 1908 में लोकमान्य तिलक ने क्रान्तिकारी प्रफुल्ल चाकी और क्रान्तिकारी खुदीराम बोस के बम हमले का समर्थन किया इस वजह से उन्हें जेल हो गयी और उन्हें 6 वर्ष कि सजा सुनाये गयी  और  उन्हें बर्मा (अब म्यांमार) स्थित मांडले की जेल भेज दिया गया। जेल में रह कर ही उन्होंनेगीता रहस्यनामक पुस्तक लिखे |

भारतीय होम रूल लीग कि स्थापना : जेल से छूटकर वे फिर कांग्रेस में शामिल हो गये बाल गंगाधर तिलक ने अप्रैल 1916 में एनी बेसेंट की मदद से होम रुल लीग की स्थापना की। होम रूल आन्दोलन के दौरान  बाल गंगाधर तिलक को काफी प्रसिद्धि मिली, जिस कारण उन्हेंलोकमान्यकी उपाधि मिली थी। इस आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य भारत में स्वराज स्थापित करना था।

निधन : बाल गंगाधर तिलक का निधन 1 अगस्त 1920 को मुंबई में हुआ। मरणोपरान्त श्रद्धाञ्जलि देते हुए गान्धी जी ने उन्हें आधुनिक भारत का निर्माता कहा और जवाहरलाल नेहरू ने भारतीय क्रान्ति का जनक बतलाया।

 

 


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