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राष्ट्रपति से प्रशिक्षु अधिकारियों की भेंट

Date : 16-Feb-2026

 नई दिल्ली, 16 फ़रवरी। भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा, रक्षा वैमानिक गुणवत्ता आश्वासन सेवा तथा भारतीय व्यापार सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से यहां राष्ट्रपति भवन में सोमवार को शिष्टाचार भेंट की।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि प्रतिष्ठित सेवाओं में उनका चयन राष्ट्रसेवा का एक महत्वपूर्ण अवसर है। अनेक युवा जहां तक पहुंचने का सपना देखते हैं, वहां तक पहुंचने का अवसर कुछ ही लोगों को मिलता है। ऐसे में वे अनेक युवाओं के लिए प्रेरणा और आदर्श बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि उदाहरण प्रस्तुत कर नेतृत्व करना उनकी पूरी सेवा-यात्रा के दौरान उनकी जिम्मेदारी रहेगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि जब अधिकारी प्रतिबद्धता के साथ भारत के विकास और प्रत्येक नागरिक के कल्याण के लिए कार्य करते हैं, तो राष्ट्र और अधिक सशक्त, सक्षम और वैश्विक मंच पर सम्मानित बनता है। आपका उत्साह और समर्पण ‘नए भारत’ के निर्माण में परिवर्तनकारी शक्ति बन सकता है।

भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे जनविश्वास के संरक्षक और वित्तीय अनुशासन के प्रहरी हैं। कार्यपालिका और लेखा परीक्षा संस्थानों के बीच समन्वय से शासन व्यवस्था में जवाबदेही की प्रभावशीलता बढ़ती है। एक प्रभावी साझेदारी सार्वजनिक व्यय की दक्षता बढ़ाने तथा वांछित परिणाम प्राप्त करने में सहायक होती है। उन्होंने अधिकारियों से संविधान और सेवा की परंपराओं व मूल्यों को सदैव बनाए रखने का आग्रह किया।

भारतीय व्यापार सेवा के अधिकारियों से राष्ट्रपति ने कहा कि वे निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन करने तथा भारतीय उद्योगों को नवाचार, विस्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी नीतियों और निर्णयों का मार्गदर्शक सिद्धांत सदैव भारत का राष्ट्रीय हित होना चाहिए। प्रत्येक व्यापार बाधा के समाधान और प्रत्येक समझौते का समर्थन भारत को एक मजबूत और सम्मानित वैश्विक व्यापार भागीदार बनाने में सहायक होगा।

रक्षा वैमानिक गुणवत्ता आश्वासन सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सशस्त्र बलों के लिए अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय हथियार एवं गोला-बारूद की उच्चतम गुणवत्ता सुनिश्चित करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी है। उनकी भूमिका विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और राष्ट्रीय रक्षा के महत्वपूर्ण संगम पर स्थित है। उन्होंने अधिकारियों से सशस्त्र बलों को बहु-आयामी समेकित अभियानों के लिए सक्षम, तकनीकी रूप से उन्नत और युद्ध के लिए तत्पर बल में रूपांतरित करने के लिए नवाचारपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।


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