गुवाहाटी, 16 फरवरी। असम में आगामी विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है। सूत्रों के मुताबिक, असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा है और इसकी एक कॉपी लाेकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी भेजी है।
बोरा ने अपने सोशल मीडिया साइट एक्स से 'कांग्रेस' का चिह्न भी हटा दिया, जिससे पता चलता है कि अब उनका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।
भूपेन बोरा ने कथित तौर पर पूर्व मंत्री एवं सांसद रकीबुल हुसैन की आलोचना की और उन पर संगठन के मामलों में दखल देने और असम कांग्रेस के अंदर असहज माहौल बनाने का आरोप लगाया।
बोरा, जो 2021 से 2024 तक असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे, राज्य में पार्टी का एक जाना-माना चेहरा रहे हैं। उन्होंने 2006 से 2016 तक लगातार दो बार बिहपुरिया विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया।
इस इस्तीफे को न सिर्फ एक निजी फैसले के तौर पर देखा जा रहा है, बल्कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में कांग्रेस के अंदर गहरी अंदरूनी दरारों के लक्षण के तौर पर भी देखा जा रहा है, क्योंकि पश्चिम ग्वालपारा से कांग्रेस के एक और मौजूदा विधायक अब्दुर रशीद मंडल आज राइजर दल में शामिल हो रहे हैं। अब्दुर रशीद मंडल ने कथित तौर पर पार्टी से अपने जाने के लिए रकीबुल हुसैन को दोषी ठहराया था।
2026 के विधानसभा चुनाव पास आने के साथ, विपक्ष की असली लड़ाई सिर्फ भाजपा के खिलाफ ही नहीं, बल्कि अपने ही खेमे के अंदर भी दिख रही है। विपक्ष की एकता के सवाल पर हाल के महीनों में अंदरूनी तनाव बढ़ गया है। एपीसीसी प्रमुख व लाेकसभा सांसद गौरव गोगोई के नेतृत्व में, कांग्रेस ने राइजोर दल और असम जातीय परिषद जैसी क्षेत्रीय ताकतों के साथ चुनाव से पहले गठबंधन बनाने की अपनी इच्छा का संकेत दिया था।
शुरुआत में, भूपेन बोरा को गठबंधन और सीट-शेयरिंग की बातचीत का नेतृत्व करने का काम सौंपा गया था, जिसे एक संतुलित और रणनीतिक कदम के रूप में देखा गया। लेकिन, बाद में बातचीत की कड़ी में रकीबुल हुसैन को शामिल करने से कांग्रेस और संभावित सहयोगियों के बीच कन्फ्यूजन और अविश्वास पैदा होने की खबर है।
राइजोर दल के नेता अखिल गोगोई ने इस डेवलपमेंट पर सबके सामने असहजता जताई। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ पर्सनैलिटी का नहीं है, बल्कि भरोसे और पारदर्शिता का है, जो गठबंधन राजनीति के दो सबसे जरूरी कारक हैं। रूलिंग पार्टी के खिलाफ एकजुट मोर्चा दिखाने के बजाय, कांग्रेस अंदरूनी पावर इक्वेशन से जूझती दिख रही है।
ऊपरी असम में, खास नेताओं को लेकर राय बंटी हुई है। गठबंधन की बातचीत में रकीबुल हुसैन को शामिल करने से पार्टी के अंदर एक धड़ा मजबूत हो सकता है, लेकिन दूसरे परेशान हो सकते हैं। देबब्रत सैकिया जैसे सीनियर नेताओं ने शायद बदलते हालात का अंदाजा लगाते हुए ज़्यादातर चुप्पी साध रखी है।
इस बीच माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस के कुछ वर्तमान विधायक भी पार्टी को छोड़ सकते हैं, जिसमें मुख्य रूप से अब्दुर रसीद मंडल, शेरमान अली, बसंत दास, कमलाक्ष दे पुरकायस्थ, सिद्दिक अहमद, शशीकांत दास आदि प्रमुख हैं।
