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चित्रकूट में 53वां राष्ट्रीय रामायण मेला आज से 19 फरवरी तक

Date : 15-Feb-2026

 चित्रकूट (उत्तर प्रदेश), 15 फरवरी । भगवान श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूट के सीतापुर में आज 53वें राष्ट्रीय रामायण मेला महोत्सव का आगाज होने जा रहा है। प्रखर समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया परिकल्पित यह मेला (15-19 फरवरी) देश का बहुमान्य सांस्कृतिक समारोह है।

रामायण मेला का उद्घाटन दोपहर दो बजे जगतगुरु राघवाचार्य और समापन 19 फरवरी को विष्णु सम्प्रदायाचार्य जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुवा करेंगे। उद्घाटन समारोह में उच्च न्यायालय प्रयागराज के न्यायमूर्ति अजीत कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

रामायण मेला के नोडल अधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) अरुण कुमार ने मेला की पूर्व संध्या पर परिसर में तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि मेला परिसर में कई विभागों की सरकारी योजनाओं की प्रदर्शनी लगेंगी। उन्होंने मेला परिसर में लगने वाले बडे़ झूला में सुरक्षा के लिए लोक निर्माण विभाग और विद्युत विभाग से एनओसी प्राप्त करने को कहा है।

आयोजन समिति के अनुसार, पांच दिवसीय यह आयोजन देशभर के संतों, कलाकारों और श्रद्धालुओं का संगम बनेगा। उद्घाटन के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला आरंभ होगी। आज बुंदेलखंडी कलाकार रामाधीन आर्य, संजोत्री पांडे और शरद अनुरागी भजन, गीत और नृत्य नाटिका 'राम की शक्ति पूजा' का मंचन करेंगे। लोक संगीत और आल्हा गायन भी आकर्षण का केंद्र रहेगा।

सोमवार को संगीता राय और आकाशवाणी के कलाकार भजन, लोकगीत, लोकनृत्य और धार्मिक नौटंकी प्रस्तुत करेंगे। 17 फरवरी को डॉ अनु सिंह और जी टीवी के रूपेश मिश्रा रामायण पर केंद्रित नृत्य नाटिका और भजन प्रस्तुत करेंगे। इन प्रस्तुतियों में रामकथा के विभिन्न प्रसंगों को जीवंत किया जाएगा।

मेले के कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत करवरिया और महामंत्री डॉ. करुणा शंकर द्विवेदी ने बताया कि जिलाधिकारी पुलकित गर्ग का मेला की तैयारियों में भरपूर सहयोग मिला है। करवरिया ने बताया कि मेले में देशभर से संत, मनीषी, कथाव्यास, सांस्कृतिक दल और कलाकार भाग लेंगे। चित्रकूट के सभी अखाड़ों के संत और महात्मा शोभायात्रा के साथ मेला भवनम् पहुंचेंगे। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन के साथ विधिवत मेला शुरू हो जाएगा।

साल 1961 में डॉ. लोहिया ने इस मेले की परिकल्पना की और उनका यह सपना 1973 में पूरा हुआ। उनका उद्देश्य रामायण के माध्यम से भारतीय संस्कृति का संवर्धन और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना था। पहले मेले का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने किया था।

पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई (1978) भी मेले का उद्घाटन कर चुके हैं। मेला की अध्यक्षता प्रख्यात कवयित्री महादेवी वर्मा कर चुकी हैं। तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री राजनारायण आयोजन समिति के संरक्षक एवं स्वागताध्यक्ष के रूप में शिरकत कर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान कर चुके हैं। देसाई के बाद तत्कालीन विदेशमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी रामायण मेला का उद्घाटन कर कार्यक्रम की भव्यता बढ़ा चुके हैं। 1991 में मेले का उद्घाटन तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकासमंत्री अर्जुन सिंह ने किया था।


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