धर्मशाला, 09 फ़रवरी।
रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) केवल हिमाचल के लिए बंद नहीं हुई, बल्कि यह नीतिगत निर्णय पूरे देश के लिए हुआ है। यह बात धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने पत्रकारों से अनौचारिक बातचीत में कही।
सुधीर शर्मा ने कहा कि पिछले वित्त आयोग 12,13,14 व 15 इस ओर बढ़ रहे थे तथा राज्यों को बार-बार यह बताया गया था कि आरडीजी राज्यों के लिए बंद कर दी जाएगी। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है, जबकि कर्नाटक ने आरडीजी बंद करने की बात कही थी।
सुधीर शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्वयं कहा था कि वर्ष 2027 में हिमाचल आत्मनिर्भर हो जाएगा, अब उनके कार्यकाल का एक ही वर्ष बचा है, ऐसे में सरकार कुछ न कुछ कर रही होगी। यही नहीं मुख्यमंत्री ने वर्ष 2032 में हिमाचल के सबसे अमीर राज्य होने की बात कही थी, ऐसे में सरकार इस दिशा में कुछ तो कर रही होगी। मुख्यमंत्री को उक्त बातों के संबंध में अपने रोड़मैप को जनता के सामने रखना चाहिए। अब वह जनता को संघर्ष के लिए तैयार रहने की बात कह रहे हैं।
सुधीर ने कहा कि जनता ने संघर्ष ही करना है तो जनता सरकार क्यों चुनेगी। प्रजातंत्र में लोकहित के लिए सरकारें बनती हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की स्थिति बहुत ही हास्यास्पद बनाकर रख दी है।
वित्त सचिव का विधायक को चिटठी लिखने का नहीं प्रोटोकाल
सुधीर शर्मा ने कहा कि अब मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि सर्वदलीय बैठक की जाएगी, उसकी चिटठी वित्त सचिव निकाल रहे हैं, जबकि वित्त सचिव का विधायक को चिटठी लिखने का कोई प्रोटोकॉल नहीं है। वित्त सचिव केवल निवेदन कर रहे हैं विधानसभा सचिव से कि ऑल पार्टी मीट बुलाइए, जिसके लिए सबसे पहले नेता प्रतिपक्ष से सबसे पहले बात होती है। सुधीर ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार प्रोटोकॉल फॉलो न करके जनता में यह भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है कि केवल हिमाचल की ही आरडीजी बंद हुई है। कांग्रेस सरकार प्रदेश को खुशहाली की ओर ले जाने की बात कह रही थी, वो क्या आरडीजी की बदौलत कही थी, क्या सरकार के पास अपने साधन, संसाधन नहीं थे, मेरा सरकार से यह प्रश्न है। सुधीर शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार पंचायत चुनावों से भाग रही है, न जाने सरकार को क्या भय सता रहा है।
