पूर्वी सिंहभूम, 09 फ़रवरी ।
मानगो नगर निगम चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी राजनीति खुलकर सामने आने लगी है। चुनावी माहौल में जहां अन्य दल अपनी रणनीति को धार देने में जुटे हैं, वहीं कांग्रेस इस वक्त गंभीर संगठनात्मक उलझन से गुजर रही है। पार्टी की प्रदेश सचिव और मेयर पद की उम्मीदवार जेबा खान को छह वर्षों तक निष्कासित किए जाने के बाद यह सियासी टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।
कांग्रेस ने मानगो नगर निगम चुनाव के लिए पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता को अपना समर्थित उम्मीदवार घोषित किया है। इसके बावजूद जेबा खान के चुनावी मैदान में डटे रहने को पार्टी ने अनुशासनहीनता माना। तमाम कोशिशों के बाद भी जब जेबा खान ने नाम वापस नहीं लिया, तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने उन्हें अगले आदेश तक पार्टी से निलंबित कर दिया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष परविंदर सिंह समेत अन्य नेताओं ने प्रेस वार्ता कर इस कार्रवाई की पुष्टि की और कहा कि पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर काम करना किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।
हालांकि इस फैसले ने कांग्रेस के भीतर भूचाल ला दिया है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने खुले मंच से जेबा खान के समर्थन में बयान दिए और उनके पक्ष में नारेबाजी भी की। इससे कांग्रेस के भीतर दो स्पष्ट गुट उभर आए हैं—एक जो संगठन के फैसले के साथ खड़ा है और दूसरा जो जेबा खान को जनाधार वाली और स्वीकार्य उम्मीदवार मान रहा है। यह टकराव केवल उम्मीदवार चयन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय नेतृत्व, प्रभाव और भविष्य की राजनीति से भी जुड़ गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेबा खान का निष्कासन कांग्रेस के लिए डैमेज कंट्रोल की बजाय नुकसानदेह साबित हो सकता है। खासकर तब, जब नगर निकाय चुनाव पार्टी चिह्न पर नहीं लड़ा जा रहा है। ऐसे में आंतरिक कलह विपक्ष को कांग्रेस पर हमलावर होने का मौका दे रही है।
मानगो का यह चुनाव अब सिर्फ स्थानीय विकास का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि कांग्रेस की संगठनात्मक एकजुटता, नेतृत्व क्षमता और अनुशासन की बड़ी परीक्षा बन गया है।
